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एक्शन में मोदी सरकार: कश्मीर भेजी अर्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियां

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल द्वारा कश्मीर घाटी में हुई उच्च स्तरीय बैठक के ठीक बाद लिए गए एक बड़े फैसले में केंद्र सरकार ने कश्मीर घाटी में सुरक्षा के मद्देनजर अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां भेजने का निर्णय किया है। गृह मंत्रालय द्वारा जम्मू-कश्मीर पुलिस के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव और गृह सचिव को लिखे पत्र में कहा गया है कि  जम्मू कश्मीर में आतंक विरोधी दस्ते को मजबूत करने और कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए जम्मू कश्मीर में अर्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियां भेजी जा रही है जिनमें सीआरपीएफ की 50 कंपनियां बीएसएफ की 10 कंपनियां, आईटीबीपी की 10 और सीमा सुरक्षा बल की 30 कंपनियां शामिल हैं। 

जम्मू कश्मीर सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने अन्य सुरक्षा बलों के साथ चर्चा करने के बाद केंद्र सरकार को राज्य में अतिरिक्त 100 कंपनियां भेजने का अनुरोध किया था जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोवाल के साथ कश्मीर में हुई संयुक्त मीटिंग के दौरान उनके सामने रखा गया जिसकी उन्होंने स्वीकृति दे दी। 

इससे पहले भी इस साल की शुरुआत में अनुच्छेद 35ए की सुनवाई से पहले केंद्र सरकार ने कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियां भेजी थी जिसमें सीआरपीएफ की 45 बीएसएफ की 35 सीमा सुरक्षा बल की 10 और आईटीबीपी की 10 कंपनियां शामिल थी। बता दें कि अमरनाथ यात्रा को लेकर पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और पिछले साल जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव के दौरान भेजी गई सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात हैं। 

कश्मीर घाटी को लेकर केंद्र सरकार अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही निर्णायक मूड में लग रही है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कश्मीर घाटी को लेकर अपना विभाग का कार्यभार संभालते ही लगातार एक्शन मोड में है। अमित शाह के कश्मीर दौरे के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का अचानक कश्मीर घाटी का दौरा करना और सुरक्षा एजेंसियों के तमाम बड़े अधिकारियों से कश्मीर घाटी में सुरक्षा के हालातों पर चर्चा करना मोदी सरकार के कश्मीर प्लान की संजीदगी दर्शाता है। 

वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार के इस एक्शन मोड से जम्मू कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दल घबराए हुए हैं। गुरुवार को कश्मीर में अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेशनल कांफ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार को धारा 370 और 35a पर निर्णय लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों के दिलों में डर भरा जा रहा है कि 15 अगस्त के बाद कुछ भी हो सकता है, और यह डर आम नागरिक नहीं बल्कि कार्यालयों में बैठे बड़े अफसर फैला रहे हैं।

संवादाता गुरुसिमरन सिंह की रिपोर्ट 

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