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महाराष्ट्र वन मंत्रालय ने बाघिन अवनी की हत्या की जांच के लिए बनाई कमेटी

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

बाघिन अवनी की शव परीक्षण रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि उसकी मौत अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव और हृदय-श्वसन तंत्र निष्क्रिय हो जाने से हो गई थी और उसके पेट तथा आंतों में तरल एवं गैस भरी होने से यह संकेत मिलता है कि उसने 4-5 दिन से कोई शिकार नहीं किया था या कुछ खाया नहीं था.

वहीं अब महाराष्ट्र फॉरेस्ट मिनिस्ट्री ने इस पूरे मामले की जांच करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है. कमेटी इस बात की जांच करेगी की बाघिन अवनी को मारने के लिए सभी नियमों का पालन किया गया था या फिर नियमों को ताक पर रखकर उसे मारा गया था. 

बाघिन अवनी को पिछले शुक्रवार को बोराती के जंग में गोली मार दी गई थी. बताया जा रहा है कि वह नरभक्षी हो गई थी और उसने यवतमाल जिले के पांढरकवडा इलाके में पिछले दो साल में 13 लोगों को मार दिया था. अनेक संस्थानों के पशु चिकित्सकों की जांच में सामने आया कि 119 किलो वजनी बाघिन को मारने के लिए इस्तेमाल की गई गोली के दो बड़े हिस्से देखे गए और अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव और हृदय-श्वसन तंत्र निष्क्रिय हो जाने से उसकी मौत हो गई थी.

रिपोर्ट की व्याख्या करते हुए एक वन्यजीव विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘तरल और गैस होना और कोई ठोस नहीं होने से साफ होता है कि बाघिन ने करीब 4-5 दिन से कोई शिकार नहीं किया था या कुछ नहीं खाया था. सामान्यत: बाघों में देखा गया है कि वे एक दिन में 25 से 30 किलोग्राम मांस खा जाते हैं और फिर सात दिन तक कुछ नहीं खाते.’ टी1 नाम की बाघिन की मौत से पशु प्रेमियों और वन्यजीव संगठनों में गुस्सा है.

वहीं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार से नाराजगी जताई थी. हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने इस पूरे घटना पर अपना बचाव करते हुए कहा कि यह दुखद है लेकिन यह जरूरी हो गया था क्योंकि बाघिन को बेहोश करने की कोशिश कर रहे वन्यकर्मियों पर उसने हमला कर दिया था.​​​​​​​ अवनी 10-10 महीने के दो शावकों की मां थी.

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