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बाघिन की हत्या की जांच पर समिति को लेकर BJP और शिवसेना के बीच जुबानी जंग तेज

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

महाराष्ट्र में आदमखोर बाघिन अवनि को मारने के मामले की जांच के लिए एक समिति बनाने को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा शनिवार को ‘‘स्वांग’’ करार दिए जाने के बाद भाजपा और शिवसेना के बीच इस मुद्दे पर जुबानी जंग तेज हो गई है. इस बाघिन की शुक्रवार को यवतमाल जिले के वन में एक अभियान में मार डाला गया था. टी-1 नामक इस बाघिन को मारे जाने को लेकर वन्य पशु प्रेमियों और वन्यजीव संगठनों द्वारा काफी आलोचना की जा रही है. उन्होंने राज्य सरकार पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

राज्य सरकार ने बाघिन की मौत की ‘‘गहराई’’ से जांच के लिए शुक्रवार को वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों की चार सदस्यीय एक समिति का गठन किया था. वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्य के वन मंत्री सुधीर मुगंतीवार ने कहा कि यदि ठाकरे चाहें तो राज्य सरकार उनके नेतृत्व में एक दूसरी समिति बनाने को तैयार है.

राज्य सरकार ने जो समिति बनाई थी उसके अगुवा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एसएच पाटिल हैं. उसमें वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सदस्य हबीब बिलाल, वाइल्डलाइफ कंजरवेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष अनीश अंधेरिया और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक नितिन काकोडकर अन्य सदस्य हैं. समिति इस बात की जांच करेगी कि क्या इस मामले में स्थापित प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किया गया. इसके बाद वह अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

ठाकरे ने शनिवार को यहां जारी एक बयान में मांग की है कि बाघिन की हत्या की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाई जाए. उन्होंने कहा, ‘‘ जिन लोगों ने बाघिन को मारने की ‘सुपारी’ दी, उन्हें (जांच) ही समिति का सदस्य बना दिया गया है. समिति बनाना एक ‘स्वांग’ है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य के वन मंत्री सुधीर मुगंतीवार का यह कह कर समर्थन करते हैं कि उन्हें इस हत्या के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय कैसे ले सकते हैं क्योंकि उन्होंने खुद तो इसे किया ही नहीं.

मुंगतीवार ने हालांकि जवाब देते हुए कहा कि अगर ठाकरे को लगता है कि समिति एक ‘स्वांग’ है तो राज्य सरकार शिवसेना प्रमुख की मंशा पर उनकी अध्यक्षता में ही अन्य जांच समिति बनाने को राजी है.

उन्होंने कहा, ‘‘उद्धव जी भाजपा और शिवसेना गठबंधन में महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हैं. अगर वह नहीं चाहते कि समिति उनकी अध्यक्षता में बने, तो उन्हें यह पता होना चाहिए कि मैंने पहले ही मुख्यमंत्री से कहा है कि उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के तहत समिति बनाएं. इस मुद्दे पर बेवजह की निम्न स्तरीय राजनीति जा रही है.’’ 

मुंगतीवार के बयान पर शिवसेना की विधानपरिषद सदस्य और प्रवक्ता नीलम गोरहे ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से ठाकरे की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का अनुरोध किया है क्योंकि शिवसेना प्रमुख के पास बाघों और वनों की गहरी जानकारी है.

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