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उपहार कांड की हो सकती है दोबारा जांच! कानून मंत्रालय का बड़ा बयान, 'शिकायत मिलेगी तो हम जांच करेंगे'

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

उपहार कांड केस दोबारा खोलने की मांग उठ रही है, ऐसे में अब कानून मंत्रालय भी कह रहा है कि अगर शिकायत मिलेगी तो हम जांच करेंगे। रिपब्लिक भारत के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ बातचीत के दौरान 2010-14 के बीच मामले की सुनवाई करने वाले पूर्व जस्टिस ज्ञानेंद्र सुधा मिश्रा ने कहा है कि इंसाफ अभी अधूरा है इसकी सुनवाई होनी चाहिए। दरअसल कानून मंत्रालय के सूत्रों ने शुक्रवार को जानकारी दी कि उन्हें 1997 के उपर आग त्रासदी मामले के घटनाक्रम की जानकारी थी और अगर शिकायत मिलेगी तो हम जांच करेंगे। 

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 1997 उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले के पीड़ितों के एक संघ की सुधारात्मक याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी थी। इसका अर्थ यह हुआ कि अंसल बंधुओं की कारावास की सजा और नहीं बढ़ाई जाएगी।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन वी रमण और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने उपहार कांड पीड़ित संघ (एवीयूटी) की सुधारात्मक याचिका पर बंद कमरे में सुनवाई की और उसे खारिज कर दिया था।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हमने सुधारात्मक याचिका और प्रासंगिक दस्तावेजों पर गौर किया है। हमारी राय में, कोई मामला नहीं बनता है.... इसलिए, सुधारात्मक याचिका खारिज की जाती है।’’

इससे पहले, नौ फरवरी 2017 को तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 के बहुमत वाले फैसले में 78 वर्षीय सुशील अंसल को आयु संबंधी दिक्कतों के चलते उसके जेल में रहने की अवधि के बराबर सजा देकर राहत दे दी थी।

पीठ ने हालांकि उसके छोटे भाई गोपाल अंसल से मामले में शेष बची एक साल की सजा पूरी करने को कहा था।

एवीयूटी ने सुधारात्मक याचिका दायर करके इस फैसले पर पुनर्विचार किए जाने का अनुरोध किया था।

दिल्ली के उपहार सिनेमा में 13 जून 1997 को ‘बॉर्डर’ फिल्म के प्रदर्शन के दौरान लगी आग में 59 लोग मारे गए थे।