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कुलभूषण जाधव मामले में एक और जीत: पाकिस्तान की ओर से जाधव को मिलेगा काउंसलर एक्सेस

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

 पाकिस्तान भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को अपने देश के कानूनों के अनुसार राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा और इसके लिए कार्यप्रणाली पर काम हो रहा है। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार देर रात एक बयान जारी कर यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने साथ ही कहा कि जाधव को राजनयिक संबंधों पर विएना संधि के तहत उनके अधिकारों से अवगत करा दिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘आईसीजे के फैसले के आधार पर कमांडर कुलभूषण जाधव को राजनयिक संबंधों पर विएना संधि के अनुच्छेद 36 के पैराग्राफ 1(बी) के तहत उनके अधिकारों के बारे में सूचित कर दिया गया है।’’ 

उसने कहा, ‘‘एक जिम्मेदार देश होने के नाते पाकिस्तान कमांडर कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान कानूनों के अनुसार राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा, जिसके लिए कार्य प्रणालियों पर काम किया जा रहा है।’’ 

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने पाकिस्तान को जाधव को सुनाई गयी फांसी की सजा पर प्रभावी तरीके से फिर से विचार करने और राजनयिक पहुंच प्रदान करने का बुधवार को आदेश दिया था। इसे भारत के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है।

भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (49) को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में सुनवाई के बाद जासूसी और आतंकवाद के आरोपों पर फांसी की सजा सुनाई थी। इस पर भारत में काफी कड़ी प्रतिक्रिया हुई। 

अदालत के अध्यक्ष अब्दुलकावी अहमद यूसुफ की अगुवाई वाली 16 सदस्यीय पीठ ने एक के मुकाबले 15 मतों से कुलभूषण सुधीर जाधव को दोषी ठहराये जाने और उन्हें सुनाई गयी सजा की ‘‘प्रभावी समीक्षा करने और उस पर पुनर्विचार करने’’ का आदेश दिया है।

बता दें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए गुरूवार को कहा कि सरकार जाधव की सुरक्षा और देखरेख सुनिश्चित करने के साथ ही उन्हें यथाशीघ्र भारत वापस लाने के लिए कोशिश जारी रखेगी।

जयशंकर ने राज्यसभा में दिए गए एक बयान में कहा कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर पाकिस्तान में गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है।

विदेश मंत्री ने कहा ‘‘ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला न केवल भारत और जाधव के लिए प्रामाणिकता का सबूत है बल्कि उन सभी के लिए भी है जो कानून व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संधियों की पवित्रता में विश्वास रखते हैं । ’’ 

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