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Raksha Bandhan: जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, महत्व और मान्यताएं

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:


भाई बहनों के पवित्र रिश्ते को मजबूत प्रेम पूर्ण आधार देने वाला त्योहार रक्षाबंधन कल यानी 15 अगस्त को मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व का ऐतिहासिक , समाजिक और राष्ट्रीय महत्व भी है।  इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रेशम का धागा बांधती हैं और उसके दीर्घायु जीवन की कामना करती है। बहन के इस स्नेह से बंधकर भाई भी उसकी जिंदगी भर रक्षा के लिए कृत संक्लप होता है। रक्षाबंधन का यह त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्‍ते को दिखाता है। 

बता दें, पौराणिक परंपरा के अनुसार राखी बांधकर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करते हैं तो वहीं भाई उनकी रक्षा का वादा करते हैं। इस दिन बहनें अपने भाई की आरती उतारती है, ललाट पर टिका लगाती हैं और राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाती हैं।

राखी पूर्णीमा को कजरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। लोग इस दिन बागवती देवी की भी अराधना करते हैं। 

परंपरा के अनुसार श्रावणी पूर्णिमा को राखी बांधन से बुरे ग्रह कटते हैं। इसके लिए बहन अपनी थाम में रोली, चन्दन , अक्षत , दही रक्षासूत्र और मिठाई रक्खें। इसके बाद घी का एक दीपक भी लेलें जिससे भाई की आरती करें।  

हर साल रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त होता है। लेकिन इस बार मुहूर्त के अनुसार ही रक्षा बंधन करवाना चाहिए। बहनें सूर्यास्त से पहले तक भाईयों को राखी बांध सकती हैं।

 यह पर्व हर साल सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह हो जाने के बाद बहन रक्षा सूत्र और पूजा की थाल सबसे पहले भगवान को समर्पित करें। इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करवाकर बैठाएं। और मिठाई खिलकार रक्षासूत्र बांध दें । इस दौरान बहन का सर खुला नहीं होना चाहिए। 

शुभ मुहूर्त

राखी बांधने का शुभ समय सुबह 05.54 - शाम 05.59 मिनट तक  पूर्णिमा रहेगी। ऐसे में आपको लगभग पूरे दिन शुभ समय मिल रहा है। पूर दिन में कभी भी राखी बांधी जा सकती है। लेकिन शाम 5.40 के पूर्व ही बांध लें तो अच्छा रहेगा।

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