General News

मोदी सरकार के आरक्षण वाले फैसले पर बोले जीतनराम मांझी - 'स्वर्णों को 10 बजाए 15 फीसदी मिले आरक्षण'

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:


देश के हालिया माहौल को देखते हुए राजनीतिक सरगर्मी परवान पर है. 2019 की पहली ही कैबिनेट बैठक में नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया. अब आर्थिक आधार पर सवर्णों को भी 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं.

स्वर्णों को आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने कहा, '' हमारी पार्टी कि शुरु से ही मांग रही है कि स्वर्णों में भी गरीब होते हैं जिनके लिए पार्टी 15 फीसदी आरक्षण की मांग करती रही हैं, साथ ही साथ यह भी आवाज बुलंद करते रहे हैं कि 49. 5 फीसदी सीलिंग है इसको बढाए बिना जो संविधान संशोधन के बिना नहीं हो सकता है. आखिर कैसे 10 फीसदी स्वर्णों को आरक्षण दिया जाएगा. 


जीतन राम मांझी ने आगे कहा , हमारी पार्टी मांग करती है कि संविधान में संशोधन करके आरक्षण की सीमा को 90 फीसदी करें साथ ही स्वर्णों को 15 फीसदी का आरक्षण दें. हमारा मानना साफ है कि अभी भी स्वर्णों के लिए 10 फीसदी की बात की है. अगर संविधान संशोधन नहीं होगा तो यह चुनावी स्टंट होगा. इसलिए भारत सरकार से मेरा विनम्र प्रार्थना है कि 15 फीसदी आरक्षण स्वर्णों को दें. जातिगत और सामाजिक जनगणना को सामने लाएं और उसी के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का भी आरक्षण का दायरा को बढाते हुए 30 फीसदी कर दें. तब जा कर भारत सरकार का यह फैसला पुर्ण मानी जा सकती है.

वहीं इससे पहले स्वर्णो के आरक्षण मामले में हार्दिक पटेल ने कहा, 'ये भी हो सकता है कि मोदी जी के पास आखिरी तीर था वो कमान से निकल गया हो. और 10 प्रतिशत जो आरक्षण की बात हुई है वो तो अभी कैबिनेट ने उसकी मंजूरी दी है. उसपर इम्प्लीमेंट कैसे करोगे. संविधान में संशोधन करने की बात कर रहे हैं वो लेकिन पिछले 10-12 दिन से पार्लियामेंट चल रही है. दो दिन बचे हैं तो तत्कालीन ऐसा फैसला करने की क्या जरूरत थी. तत्कालीन ये फैसला है तो उसपर क्या इम्प्लीमेंट कर पाओगे या नहीं कर पाओगे. इस पर भी काफी सवाल है और दूसरी बात है कि संविधान ने तो स्पष्ट बोला है कि कास्ट और सोशल बैकवर्ड के आधार पर आरक्षण लागू हो सकता है तो ये कैसे हो पाएगा.

आपने ना सवर्णों के सर्वे करवाए ना सवर्णों का आर्थिक तौर पर, सामाजिक तौर पर कितना पिछड़ापन है वो भी सर्वे नहीं करवाए. तो इसको लागू करने का जो फॉर्मूला है मुझे लगता है कि जुमला भी हो सकता है कि जिस तरह से 15 लाख का जुमला था, जिस तरह से 2 करोड़ रोजगार का जुमला था. तो ये जुमला साबित ना हो उसपर बड़ा सवाल है. 

संविधान में कॉलम 14 और 16 के आधार पर आप शिक्षा और रोजगार के मामले पर आरक्षण दे सकते हैं. लेकिन इनका क्या फॉर्मूला है पूरा, उनकी कैबिनेट ने क्या पूरी सूची तैयार की उसपर भी अभ्यास करना पड़ेगा. और दो दिन बचे हैं. कुछ दिनों बाद लोकसभा चुनाव का ऐलान हो जाएगा. 

हार्दिक पटेल ने कहा - बिना सर्वे और संविधान के सूची में रहे आपने फैसला ले लिया वह लागू कैसे हो सकता है. गुजरात में 10 फीसदी आरक्षण दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया था. तो प्रधानमंत्री मोदी जी ऐसे कैसे लागू कर देंगे. 

जो शुरुआत मोदी जी ने किया है अगर ये संवैधानिक तौर पर लागू होता है तो उसका स्वागत करते हैं. अगर नहीं तो जुमला ही कहेगें. इसपर तुरंत लागू होनी चाहिए. अगर कुछ दिनों में इसे लागू करवाते हैं और अगर इससे लोगो को आर्थिक तौर पर और शिक्षा समेत रोजगार में फायदा मिलता है तो इसका स्वागत करते हैं.और लोगों से वोट लेने का प्रयास करने के लिए जुमला साबित करेगें  तो इसको हम स्वीकार नहीं करेगें. इसका विरोध होगा. 

अगर 10 फीसदी आरक्षण लागू हो जाता तो फायदे ही होगा. जिसकी जितनी संख्यादारी उसकी उतनी भागीदारी मिलना चाहिए. संवैधानिक तौर पर लागू होना चाहिए.
 

DO NOT MISS