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PAK को बड़ा झटका.. पाकिस्तान जाने वाले पानी को ऐसे रोकेगा भारत, यहां देखें

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भार लगातार एक के बाद एक कड़े फैसले ले रहा है। इसी कड़ी में भारत ने सिंधु जल संधि के तहत नदियों से अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने का फैसला किया है। इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दी।

हालांकि, एक अधिकारी ने बाद में इसे साफ किया कि यह कोई नया फैसला नहीं है और जल संसाधन मंत्री सामान्य तौर पर वही दोहरा रहे हैं जो वह हमेशा कहते आए हैं।

मंत्री गडकरी ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले ‘हमारे हिस्से के पानी’ को रोकने का फैसला किया है। हम पूर्वी नदियों की धारा को बदल देंगे और उसे जम्मू कश्मीर तथा पंजाब में अपने लोगों तक पहुंचाएंगे।’’ 

पुलवामा आतंकी हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ना लाज़मी है। गौरतलब है कि 14 फरवरी को हुए इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। 

भारत ने पाकिस्तान को दिए गए तरजीही राष्ट्र (MFN) का दर्जा भी कुछ ही दिन पहले वापस लेने का फैसला किया था। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसे अलग थलग करने की कूटनीतिक कोशिशें की जा रही हैं। 

गडकरी के इस ट्वीट के बारे में जल संसाधन मंत्रालय की प्रभाारी सूचना अधिकारी नीता प्रसाद ने कहा, ‘‘सिंधु संधि के बारे में ट्वीट (गडकरी का), कोई नया फैसला नहीं है। मंत्रीजी ने सामान्य तौर पर वही बात दोहराई है जो हमेशा कहते आए हैं। वह सिंधु के जल का पाकिस्तान जाने वाले भारत का हिस्सा मोड़ने की बात कर रहे हैं - और वह हमेशा से यह कहते आए हैं।’’

अधिकारियों ने कहा कि फैसले के वास्तविक क्रियान्वयन में छह साल तक का वक्त लग सकता है क्योंकि जल का प्रवाह रोकने के लिए 100 मीटर की ऊंचाई वाले बांध बनाने होंगे। उल्लेखनीय है कि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत पश्चिम की नदियों - सिंधु, झेलम और चेनाब का जल पाकिस्तान को दिया गया जबकि पूर्वी नदियों - रावी, ब्यास और सतलुज का जल भारत को दिया गया।

गडकरी ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि रावी नदी पर शाहपुर..कांडी बांध का निर्माण शुरू हो गया है। इसके अलावा यूजेएच परियोजना के जरिये जम्मू कश्मीर में उपयोग के लिये हमारे हिस्से के पानी का भंडारण होगा और शेष पानी दूसरी रावी व्यास लिंक के जरिये अन्य राज्यों के बेसिन में प्रवाहित होगा । 

इस बीच, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर द्वारा फिलहाल नहीं उपयोग किए जा रहे फाजिल जल का इस्तेमाल पंजाब, हरियाणा और राजस्थान कर सकेगा। 

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