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मसूद अजहर के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के साथ काम करता रहेगा भारत

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

नयी दिल्ली- भारत आतंकी गुट जैश-ए-मुहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में डालने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की प्रतिबंध समिति के साथ काम करना जारी रखेगा और संयम बनाए रखेगा। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। 

चीन द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को एक बार फिर अपने वीटो अधिकार के जरिये नाकाम करने के कुछ दिनों बाद सूत्रों ने यह बात कही है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदम वास्तव में दिखावटी हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा, ‘‘ जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की दिशा में भारत यूएनएससी की प्रतिबंध समिति के साथ काम करना जारी रखेगा।’’ 

सूत्रों ने कहा कि भारत का मानना है कि ‘‘ आतंकवाद चीन के लिए एक प्रमुख मुद्दा है। उन्हें पता है कि पाकिस्तान में कई आतंकवादी समूह सक्रिय हैं।’’ 

चीन के अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में बाधा डालने पर सूत्रों ने कहा कि हम जितना भी समय लगे संयम बनाए रखेंगे।

अजहर मुद्दे पर चीन के अड़ंगे के बारे में सरकारी सूत्रों ने कहा कि ऐसे कई मुद्दे हैं जिन्हें चीन को पाकिस्तान के साथ सुलझाने की जरूरत है।

चीन ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान में सक्रिय ‘आतंकवादी संगठन’ के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव को चौथी बार तकनीकी रोक के जरिये खारिज कर दिया था। 

भारत ने चीन के इस कदम को ‘‘निराशाजनक’’ करार दिया था। इधर ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अब चीन के साथ गहन ‘‘सद्भावना’’ वार्ता कर रहे हैं, ताकि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति में वैश्विक आतंकवादी घोषित करने को लेकर कोई ‘‘समझौता’’ किया जा सके।

इस मामले के जानकार लोगों के अनुसार अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने संबंधी प्रस्ताव की भाषा को लेकर भी चीन से बातचीत कर रहे हैं।


चीन ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति में पेश प्रस्ताव को बुधवार को अपने वीटो के अधिकार के माध्यम से चौथी बार बाधित कर दिया था। इस प्रस्ताव को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने पेश किया था।