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NATIONAL APPROVAL RATINGS: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को बड़ी बढ़त, NDA को मिल सकती हैं 8 सीट

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

लोकसभा चुनाव का अब आधिकारिक काउंटडाउन शुरू हो गया है. लिहाजा अब राजनीतिक पार्टी के साथ देश की जनता को पता चल गया कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व यानि आम चुनाव कब होना है.  रिपब्लिक टीवी के लिए सी वोटर ने लोकसभा चुनाव से पहले  42 सीटों वाले पश्चिम बंगाल का ताजा मूड जानने की कोशिश की है. जिसके आंकड़ो से इसकी पुष्टि होती है. भाजपा को बंगाल के सूदूर इलाकों में जबरदस्त फायदा मिलने का अनुमान जताया गया है. 

पश्चिम बंगाल में रिपब्लिक टीवी और सी वोटर के National Aproval Rating के मुताबिक बीजेपी को तृणमूल कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर होने वाली है. लेकिन वर्षों से सूबे में राजनीतिक जमीन तलाश रही बीजेपी को तगड़ा फायदा होने का अनुमान जताया जा रहा है. 

पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। यहां एनडीए को 8 सीटें मिलने का अनुमान है। टीएमसी को 34 सीटें मिल सकती हैं। जबकि यूपीए और सीपीएम को एक भी सीट मिलती हुई नहीं दिख रही है।

सर्वे के मुताबिक पश्चिम बंगाल में अगर कांग्रेस और ममता बनर्जी साथ आए तो टीएमसी को 34 सीटें मिल सकती हैं। जबकि यूपीएम के खाते में एक भी सीट जाती हुई नहीं दिख रही है। यहां एनडीए को 8 सीटें मिल सकती हैं।

National Aproval Rating के अनुसार भाजपा के दूसरी बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर सामने आने की उम्मीद है. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा राज्य की 42 में से 7 सीटें जीत सकती हैं .
बता दें कि 2014 में मोदी लहर में भी पश्चिम बंगाल में भाजपा को केवल दो लोकसभा की सीटें मिली थीं. ऐसे में अगर National Aproval Rating का दावा सही साबित होता है तो निश्चित तौर पर इसे भाजपा की बड़ी सफलता कही जाएगी. इसमें बात का उल्लेख किया गया है कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस को 34 सीटें ही मिल पाएंगी. 2014 में तृणमूल को 33 सीटों पर जीत मिली थी. इस बार 1 सीट का फायदा नजर आ रहा है. 

तृणमूल के अलावा माकपा को एक भी सीट नहीं मिलने का दावा किया गया है. रैंटिंग में जिक्र किया गया है कि 34 सालों तक बंगाल की सत्ता पर काबिज रहने वाली वामपंथी पार्टियों को लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलेगी.

हालांकि कांग्रेस को कम से कम एक सीट मिलने की उम्मीद है. बता दें 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी बड़े पैमाने पर पश्चिम बंगाल में अपनी संगठन क्षमता को मजबूत करने में सफल हुई है. हाल ही में संपन्ना हुए पंचायत चुनाव में इसके प्रमाण भी मिले हैं. वहीं ग्रामीण बंगाल के अधिकतर क्षेत्रों में मतदान के दौरान व्यापक हिंसा और छापेमारी के बावजूद तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशियों को मात देकर भाजपा बोर्ड गठन कर चुकी है.

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