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मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, 'अगले पांच वर्षों में ढाई करोड़ अल्पसंख्यक छात्राओं को मिलेगी छात्रवृत्ति'

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल को एक महीना भी नहीं हुआ है, और मोदी सरकार एक के बाद अपने वादों को जमीनी हकीकत में तब्दील करती नजर आ रही हैं, आज मोदी सरकार ने मुस्लिम समाज को एक बहुत बड़ा तोहफा किया है, जिसके मुताबिक अब मदरसों को औपचारिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा।

यह फैसला इस लिए लिया गया है ताकि मदरसों के बच्चे भी समाज के विकास में योगदान दे सकें। इस फैसले के बाद मदरसों में पढ़ने वालों बच्चों को  विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषयों की शिक्षा मिलेगी। इस योजना की शुरुआत अगले माह से हो जाएगी। इसके साथ ही अगले पांच साल में अल्पसंख्यक समुदायों के 5 करोड़ छात्रों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसमें 50 प्रतिशत लड़कियां शामिल होंगी।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था ‘मौलाना आजाद शिक्षा प्रतिष्ठान’ (एमएईएफ) की 65वीं जनरल बॉडी की बैठक में निर्णय लिए गए।

बैठक के बाद नकवी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली इंसाफ, ईमान और इकबाल की सरकार ने विकास की सेहत" को साम्प्रदायिकता एवं तुष्टिकरण की बीमारी से मुक्ति दिलाकर सेहतमंद, समावेशी, सशक्तिकरण का माहौल तैयार किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ देश भर के मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए मदरसा शिक्षकों को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाया जायेगा ताकि वे मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा- हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, कंप्यूटर आदि- दे सकें। यह काम अगले महीने से शुरू कर दिया जायेगा।’’ 

आपको याद होगा कि पीएम मोदी को जब संसदीय दल का नेता चुना गया था तब उन्होंने कहा था अल्पसंख्यकों के साथ सालों तक छल हुआ है, और अब वक्त आ गया है कि छल में छेद किया जाए।

बहरहाल केंद्र सरकार की नई नीति से पांच करोड़ से ज्यादा गरीब अल्पसंख्यक वर्गों के गरीब छात्र छात्राओं को वजीफा मिलेगा. इस नीति से अल्पसंख्यक वर्गों के तीन पहलू विकास यानी शिक्षा, रोजगार और सशक्तिकरण के जरिए करने की है।

मंत्री ने कहा कि "3E- एजुकेशन (शिक्षा), एम्प्लायमेंट (रोजगार व रोजगार के मौके) एवं इम्पावरमेंट (सामाजिक-आर्थिक-सशक्तिकरण)" कार्यक्रम के तहत अगले पांच वर्षों में प्री-मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक एवं मेरिट-कम-मीन्स आदि योजनाओं द्वारा पांच करोड़ विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाएगी, जिनमें 50 प्रतिशत से ज्यादा लड़कियों को शामिल किया जाएगा। इनमें आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की लड़कियों के लिए 10 लाख से ज्यादा ‘बेगम हजरत महल बालिका छात्रवृत्ति’ भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि "पढ़ो व बढ़ो" जागरूकता अभियान के अंतर्गत उन सभी दूर दराज क्षेत्रों में जहां सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ापन है तथा लोग अपने बच्चों को शैक्षणिक संस्थानों में नहीं भेज पा रहे हैं, उन माता-पिताओं को अपने बच्चों को शैक्षणिक संस्थानों में भेजने हेतु जागरूक एवं प्रोत्साहित किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा पर फोकस किया जाएगा। साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं को सुविधा एवं साधन उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी काम किया जाएगा।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत इस दावे के साथ हुई कि पहले नारा था.. सबका साथ सबका विकास और अब सबका साथ.. सबका विकास और सबके विश्वास का भरोसा.. आज इस कदम की शुरुआत हो गई है.. 

लेकिन मदरसों को आधुनिक बनाने की ये कोई पहली कोशिश नहीं है.. पहले भी ऐसी आवाजें उठी तो विरोध शुरू हुआ.. आखिर मदरसो को मॉडर्न बनाने के दुश्मन कौन हैं.. मदरसों में बच्चे पढ़ें और आगे बढ़ें इस सोच से परेशानी कैसी.. 


(इनपुट- भाषा)

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