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क्या पुलिस और वकील ने छोटे से विवाद को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दी है? जानें इस मुद्दे पर अर्नब की राय

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

दिल्ली में बीते 5 दिन से वकील और पुलिस की जंग जारी है। तीस हजारी कोर्ट से शुरू हुआ विवाद धरने और धमकी के रास्ते से आगे बढ़कर हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। दोनों ही पक्ष ये बात भूल रहे हैं कि उनकी ये लड़ाई कानून से जनता के विश्वास को और कमजोर कर रही है। हालांकि दोनों के तर्क हैं कि वो जिम्मेदारी के साथ हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

इसी कड़ी में दिल्ली की सभी छह जिला अदालतों में वकीलों ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन काम ठप रखा। कुछ अदालतों में तो उन्होंने वादियों को परिसर के भीतर भी नहीं जाने दिया। तीस हजारी अदालत परिसर में दो नवंबर को वकीलों और पुलिस के बीच हुई झड़प की घटना के विरोध में वकील प्रदर्शन कर रहे हैं और काम का बहिष्कार कर रहे हैं।

वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि तीस हजारी अदालत परिसर में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प पर तीन नवंबर को दिए गए फैसले को लेकर स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं है और यह अपने आप में स्पष्ट है। केंद्र ने अर्जी में अदालत से अनुरोध किया था कि वह तीन नवंबर के आदेश पर स्पष्टीकरण दे क्योंकि इससे बाद में हुई गैरकानूनी गतिविधियों पर कार्रवाई करने में बाधा उत्पन्न हो रही है।

तीन नवंबर के आदेश के बाद सोमवार और मंगलवार को साकेत अदालत परिसर के बाहर वकीलों ने ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी और एक नागरिक की पिटाई की थी। इन मामलों में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। सवाल ये क्या कानून के पहरेदार अपनी मर्जी के मालिक हैं.. क्या कानून उनके लिए नहीं है.. और अगर लड़ाई पुलिस वकील की है.. तो जनता उसके नतीजे क्यों भुगते.

अर्नब की राय 

दिल्ली में पुलिस और वकील की, 5 दिन से चल रही लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई है। वकीलों ने कल फिर हड़ताल का ऐलान किया है, पुलिस भी अपनी मांग पर अड़ी हुई है। दोनों के पक्ष में देश भर में गुटबाजी हो रही है, मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, हाईकोर्ट में आज जो सुनवाई हुई, उससे ये साफ हो गया कि पार्किंग का छोटा सा विवाद था। जिसके बाद पुलिस और वकील दोनों ने मारपीट की। इसका मतलब दोनों ही हंगामे के जिम्मेदार हैं, लेकिन कोई भी सच्चाई मानने को तैयार नहीं। एक दिन वकील हड़ताल करते हैं, अगले दिन पुलिस धरना देती है, थाने में पुलिस नहीं है और कोर्ट में वकील नहीं है। पुलिस और वकील के इस झगड़े में जनता परेशान हो रही है। आज ये विवाद दिल्ली में है.. कल देश भर में हो सकता है।

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