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गुजरात राज्यसभा उपचुनाव : न्यायालय ने कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई से इंकार किया

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

उच्चतम न्यायालय ने गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों पर अलग-अलग उपचुनाव कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली प्रदेश कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार को इंकार कर दिया।

बहरहाल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अवकाश पीठ ने गुजरात कांग्रेस को दोनों सीटों पर उपचुनाव संपन्न होने के बाद ‘चुनाव याचिका’ दायर करने की छूट दी।

केन्द्रीय मंत्रियों अमित शाह और स्मृति ईरानी के चुन कर लोकसभा आने के कारण दोनों सीटें रिक्त हुई हैं। चुनाव याचिका के माध्यम से संसदीय, विधायी और स्थानीय चुनावों के परिणाम पर सवाल उठाए जा सकते हैं।

यह याचिका गुजरात में कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता परेशभाई धनानी ने दायर की है।

बता दें गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी के क्रमश: गांधीनगर और अमेठी से लोकसभा पहुंचने के बाद गुजरात से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो गई हैं।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया था कि राज्यसभा सहित सभी सदनों के लिये उपचुनाव के लिये रिक्त स्थानों को ‘‘अलग रिक्तियां’’ माना जाता है और इसके लिये अलग-अलग अधिसूचना जारी होती है। चुनाव भी अलग-अलग होता है, हालांकि इसका कार्यक्रम एक हो सकता है। इन दोनों सीटों के लिए चुनाव पांच जुलाई को ही होने हैं।

धनानी ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग के आदेश को असंवैधानिक, मनमाना और गैरकानूनी घोषित करते हुये इसे रद्द करने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि आयोग के इस आदेश से संविधान के अनुच्छेद 14 का हनन होता है।

उन्होंने निर्वाचन आयोग को उपचुनाव एकसाथ कराने और गुजरात सहित सभी राज्यों में सारी रिक्त सीटों के लिये साथ में चुनाव कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। 

कांग्रेस के विधायक ने याचिका में यह भी कहा है कि गुजरात में राज्य सभा की दो सीटों के लिये अलग-अलग चुनाव जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत प्रदत्त आनुपातिक प्रतिनिधित्व की योजना का संतुलन बिगाड़ेगा। याचिका में कहा गया है कि संविधान और जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत यह बुनियादी सिद्धांत है कि यदि चुनाव के समय नियमित रिक्तियां हैं तो इसे एकसाथ कराया जाना चाहिए ताकि इन चुनावों में एकल हस्तांतरित मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था लागू की जा सके।

गुजरात की 182 सदस्यीय विधान सभा में भाजपा के 100 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के 75 सदस्य हैं जबकि सात स्थान रिक्त हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा निर्वाचन आयोग कार्यालय का अपने राजनीतिक प्रचार के लिये इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पूरी तरह से दुराग्रहपूर्ण और मनमानी है।

कांग्रेस ने गुजरात की दोनों रिक्त सीटों के लिये एक साथ चुनाव कराने की मांग की है क्योंकि अलग-अलग चुनाव होने पर सत्तारूढ़ दल होने के कारण भाजपा को दोनों स्थानों पर जीत हासिल करने की स्थिति में होगी।

निर्वाचन आयोग ने 15 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय के 1994 और 2009 के दो फैसलों का हवाला दिया है जिसमें जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत एक ही राज्य में अलग-अलग उपचुनाव कराने की व्यवस्था का समर्थन किया था।

( इनपुट-भाषा से )

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