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केंद्रीय मंत्री गिरिराज ने कहा- 'दुनिया की कोई ताकत राम मंदिर बनने से नहीं रोक सकती'

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

सालों से चल रहे अयोध्या विवाद पर को भले ही कभी टिप्पणी में सुप्रीम कोर्ट ने महज जमीनी विवाद करार दिया हो, लेकिन हकीकत यही है कि यह संवेदनशील मुद्दा है. सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद भगवान राम के नाम पर सियासत में भूचाल सा आ गया है. 

अयोध्या विवाद पर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. अपने बयानबाजी से सुर्खियों में रहने वाले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए तड़कता भड़कता बयान देते हुए कहा कि, 'देश में कई ऐसे मुद्दे आए जिसके लिए आधी रात को कोर्ट का दरवाजा खटखटा कर मामले को सुलझा दिया गया'

गिरिराज सिंह ने इस दौरान ये भी कह दिया कि ''लोगों के सब्र का बांध टूट रहा है और दुनिया की कोई भी ताकत राम मंदिर को बनने से नहीं रोक सकती है. कई साल बीत जाने के बावजूद अभी तक राम मंदिर नहीं बन सका है. देश की सवा सौ करोड़ जनता में व्याकुलता और आक्रोश है. सरकार एवं न्यायालय को आगे बढ़कर इस मसले को सुलझा लेना चाहिए''

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये भी देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस पार्टी इस मामले में कैसे सामने आती है और देश में मौजूद अन्य पार्टियां देश की जनता के सामने क्या रुख अपनाती हैं.

''रामलला के मंदिर को विदेशी लुटेरों ने ध्वस्त किया था. यही वजह है कि राम मंदिर हमारी धार्मिक आस्था के साथ ही हमारी राष्ट्रीय अस्मिता से भी जुड़ा हुआ है. देश के अल्पसंख्यक लोग भी राम मंदिर निर्माण के पक्षधर हैं. अब वो दिन दूर नहीं जब राम मंदिर निर्माण की स्थिति जल्द ही साफ हो जाएगी''

राम मंदिर पर CM योगी-

इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 'न्याय में देरी से लोगों को निराशा होती है लेकिन कोई ना कोई रास्ता अवश्य निकलेगा. देश की न्यायपालिका के प्रति सबका सम्मान है और हम भी उन संवैधानिक बाध्यताओं से बंधे हैं. स्वाभाविक रूप से अगर न्याय में देरी होती है तो लोगों को निराशा होती है.’’ उन्होंने कहा था, ‘‘इस समस्या के समाधान के लिए हम लोग व्यापक विचार विमर्श कर रहे हैं और कोई ना कोई रास्ता अवश्य निकलेगा. मेरा ये विश्वास है.’’

गौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई को जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया था. जिसके बाद से ही देश की राजनीति काफी तेज हो गई. कोई राम मंदिर पर अध्यादेश लाने की बात कर रहने लगा. तो कोई सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सवाल खड़े करने लगा. लेकिन इन सबके बीच शुरू हुई बयानबाजी अबतक नहीं थमा है. 

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