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सेना के नाम के दुरुपयोग को लेकर राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी से कई सैन्य अधिकारियों का इंकार

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

इस बार चुनाव में सबसे बड़ा सियासी मुद्दा सेना बन गई है। सेना को राजनीतिक पार्टियों के नाम पर बांटा जा रहा है। इस बीच एक चिट्ठी का जिक्र हो रहा है। हालांकि वो चिट्ठी सिर्फ सोशल मीडिया पर है।  बताया जा रहा है कि सेना के 156 रिटार्यड अफसरों ने राष्ट्रपति को एक चिट्ठी लिखी है। जिसमें ये कहा गया है कि सेना का इस्तेमाल राजनीति के लिए न हो। लेकिन कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने ऐसी कोई चिट्ठी लिखने से इनकार किया है । इस चिट्ठी को आज कांग्रेस ने राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश की लेकिन कांग्रेस का ये दांव उल्टा पड़ गया।   

हिंद की सेना सरहद पार दुश्मन से ज्यादा देश में सेना के नाम पर हो रही सियासत से लड़ रही है।  चुनावी दौर है इसलिए फौज को कभी मोदी की सेना बताया जा रहा है तो कभी एयर स्ट्राइक को राजनीतिक प्रोपेगेंडा। आप कोई भी चुनावी भाषण सुन लीजिए, इसमें सेना और सियासत का जिक्र मिलेगा।  एक पार्टी कहती है सेना ने देश का सम्मान बढ़ाया तो दूसरी कहती है सेना को राजनीति का सामान बनाया। यानी यह चल है कि अब सेना का शौर्य सियासत के शोर में खो रहा है।

बता दें कांग्रेस ने आज एक बार फिर सेना पर सियासत की शुरुआत की और पूर्व सैनिकों द्वारा लिखी गई एक तथाकथित चिट्ठी को इसका आधार बनाया। लेकिन दिन ढलते ढलते चिट्ठी पर सैनिक भी बंट गएं।  पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एस एफ रोड्रिग्स और पूर्व  एयर चीफ मार्शल एन सी सूरी  ने इससे इनकार किया। जबकि मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ और  जनरल शंकर रॉय चौधरी चिट्ठी से सहमत दिखाई दिए । 

इससे पहले राष्ट्रपति भवन ने भी ऐसी कोई चिट्ठी मिलने से इनकार किया। तो क्या कांग्रेस राजनीतिक फायदे के लिए एक बार फिर सेना का इस्तेमाल कर रही है। पहले सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे गए फिर पुलवामा के बदले पर भी कांग्रेस को यकीन नहीं आया और अब कांग्रेस ने अर्ध सत्य वाली एक चिट्ठी को आधार बनाकर अपनी राजनीति चमकाने की घटिया कोशिश की है।

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