PC - Twitter/ Keshav Suri
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Section 377 के अवैध करार होने के बाद मीडिया की सुर्खियों में छाए ये GAY कपल !

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

समलैंगिक संबंधों को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए 377 को अवैध करारा दिया. इसे सुनते ही समलैंगिक वयस्कों की आंखों से खुशी के आंसू गिरने लगे. इन्हें देखकर ऐसा लगा कि बरसों से बेचैन इंसान को आज आजादी मिली हैं.

लेकिन इन सब से परे एक गे कपल मीडिया की सुर्खियों में छाए रहे. ललित होटल के वारिस केशव सूरी भारत में गे अधिकारों के एक्टिविस्ट हैं. और उन्होंने ही 23 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता (IPC) के Section 377 के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. 

इसके बाद केशव इसी साल जून में पेरिस जाकर अपने समलैंगिक पार्टनर साइरल एफ के साथ विवाह के सूत्र के बंध गए. दोनों 10 साल तक एक -दूसरे के साथ रिलेशनशिप में रहे और दिल्ली के वंसत विहार इलाके में लीव-इन में रहते थे. साइरल एफ दिल्ली से बाहर एक ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक कंपनी चलाते हैं जो भारतीय सामान को लेकर करार है. 

अपने  ट्विटर हैंडल पर शादी की घोषणा करते हुए सूरी ने लिखा , ''10 साल हमने काफी तकलीफें झेलीं, मुझे बीते इन सालों के हर एक पल से प्यार है. अब मेरे साथ ही ऐसे ही 10 साल और चलो , मुझे पता है कि यह एक उत्पीड़न जैसा होगा लेकिन मैं हर एक सजा के लिए तैयार हूं.''

केशव सूरी होटल मालिक ललित सूरी के बेटे हैं. ललित सूरी ने ही भारत होटल्स की श्रृंखला की शुरुआत की थी. इनकी कंपनी दिल्ली, मुंबई, गोवा, बेंगलुरू, लंदन और अन्य शहरों में करीब दर्जन भर लक्जरी संपत्तियों को चलाती है.

33 केशव सूरी भारत में LGBT कम्युनिटी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट अप्रैल में दाखिल की गई अपनी याचिका में कहा था कि वे अपनी जिंदगी उनपर झूठा केस लगा दिए जाने के दवाब में जी रहे हैं. इसलिए अपनी जिंदगी आत्मसम्मान के साथ जी पाने में असमर्थ हैं. जिससे वह अपने एक दशक से साथ रह रहे पार्टनर के साथ अपने जीवन गुजारने के चयन के अधिकार का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं.

इस मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा , जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि इस याचिका को भी पांच सेलिब्रिटीज की दायर की गई याचिका के साथ मिलाकर ही सुनवाई की जाएगी. जिसे पहले ही संवैधानिक बेंच के सामने रखा जा चुका है. 

भारतीय दंड संहिता का सेक्शन 377 अंग्रेजों के दौर में सन 1860 में बना था. जिसे पिछले कुछ सालों में हटाए जाने के बहुत प्रयास हुए थे. लेकिन इसे हटाने की मांग को लेकर हवाला दिया गया कि यह संविधान द्वारा दिए गए निजता के अधिकार का प्रत्यक्ष रूप से हनन है. 

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस कपल ने होटल ललित की छत पर LQBTQ अधिकारों से जुड़ने वाला झंडा फहराकर और अपने होटल में केक काटकर इस फैसले को इंज्वाए किया.

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