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चुनाव आयोग पड़ताल करेगा,जम्मू कश्मीर में तत्काल आचार संहिता लागू की जा सकती है या नहीं

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

जम्मू और कश्मीर में सियासी घटनाक्रम के बाद गवर्नर सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग करने का शासनदेश जारी कर दिया. इसके बाद चुनाव आयोग इस बात का अध्ययन करेगा कि क्या जम्मू कश्मीर में नये सिरे से चुनावों की घोषणा होने से पहले ही वहां आदर्श आचार संहिता लागू की जा सकती है या नहीं .

चुनाव आयोग ने हाल ही में फैसला किया था कि जिन राज्यों में समय पूर्व विधानसभाओं को भंग कर दिया जाता है, वहां आचार संहिता तत्काल प्रभाव में आएगी .

अन्यथा कार्यवाहक सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी को नीतिगत फैसले लेने से प्रतिबंधित करने वाली आचार संहिता चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखें घोषित करने के दिन से लागू होती है।

तेलंगाना पहला राज्य है जहां विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले आदर्श आचार संहिता लागू की गयी.

उन्होंने कहा, ‘‘तेलंगाना में आचार संहिता लागू की गयी जहां निर्वाचित सरकार ने विधानसभा को भंग कर दिया. यहां (जम्मू कश्मीर में) स्थिति अलग है। यहां विधानसभा मजबूरी के चलते भंग की गयी हो सकती है। यहां कोई सरकार नहीं थी। हम आने वाले दिनों में इस बात का अध्ययन करेंगे कि जम्मू कश्मीर में भी आचार संहिता लागू की जा सकती है या नहीं. ’’ 


बता दें कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने धारा 53 के तहत विधानसभा भंग करने का आदेश दिया. इससे पहले पीडीपी ने एनसी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया था. इसके साथ ही पीडीपी में बगावत की खबरें भी सामने आई है. कुछ विधायकों ने गठबंधन सरकार बनाने का विरोध किया. 

इससे कुछ ही समय पहले जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस के समर्थन से जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने का दावा पेश किया था. 

विधानसभा भंग किए जाने के बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा कि , '' एक राजनेता के रूप में मैंने अपने 36 साल के राजनीतिक करियर में इस तरह की स्थिती नहीं देखी थी ! मैं हमारे सहायता के लिए उमर अब्दुल्ला और अंबिका सोनी जी के प्रति दिल से आभार व्यक्त करना चाहती हूं. 


महबूबा मुफ्ती ने अगले दूसरे ट्वीट में कहा कि , 'पिछले पांच महीनों से , राजनीतिक उथल पुथल के बावजूद  हमने मांग कि की ख़रीद फरोख को रोकने के लिए विधानसभा तुरंत भंग कर दिया जाए. लेकिन हमारी अपील पर ध्यान नहीं दिया गया. 


आखिरी ट्वीट करते हुए महबूबा मुफ्ती ने लिखा कि टेक्नोलॉजी के युग में यह बहुत अजीब बात है कि गवर्नर के निवास पर फैक्स मशीन को हमारे फैक्स नहीं मिले. लेकिन विधानसभा भंग के संबंध में सूचना तेजी से जारी किया गया. 

विधानसभा भंग करने के राज्यपाल के फैसले के बाद उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, "नेशनल कॉन्फ्रेंस पिछले पांच महीने से विधानसभा भंग करने की मांग कर रहा था. यह कोई संयोग नहीं हो सकता है कि पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती के सरकार बनाने के दावे के मिनटों बाद ही राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने का फैसला किया हो."

( इनपुट - भाषा से भी)

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