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मुजफ्फरपुर आश्रयगृह काण्ड: यौन उत्पीड़न की घटनाओं का विवरण ‘भयानक’ और ‘डरावना’ है: न्यायालय

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

उच्चतम न्यायालय ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में लड़कियों से कथित यौन हिंसा और बलात्कार के आरोपों की जांच कर रहे केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की रिपोर्ट में दिये गये विवरण को बृहस्पतिवार को ‘भयानक’ और ‘डरावना’ करार दिया.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की प्रगति रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कहा कि इसमें तो लडकियों को नशीला पदार्थ देने सहित बहुत ही हतप्रभ करने वाले तथ्य सामने आये हैं .

पीठ ने कहा, ‘‘यह सब क्या हो रहा है? यह तो बहुत ही भयानक है। बच्चों के लिये यह क्या नशीला पदार्थ है?’’ इस मामले में प्रमुख आरोपी बृजेश कुमार के बहुत अधिक प्रभावशाली होने संबंधी सीबीआई के आरोप को पीठ ने ‘बहुत ही गंभीर’ बताया .

शीर्ष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चन्द्रशेखर वर्मा का पता लगाने में हुये विलंब पर बिहार सरकार और सीबीआई से सफाई मांगी है .

पीठ ने पिछले महीने ही बिहार पुलिस को आदेश दिया था कि पूर्व मंत्री और उनके पति के यहां से बड़ी संख्या में हथियार बरामद होने के मामले की वह जांच करे .

इस आश्रय गृह कांड में पति चंद्रशेखर वर्मा का नाम सामने आने की की वजह से मंजू वर्मा को बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था . यह भी पता चला था कि इस साल जनवरी से जून के दौरान चन्द्रशेखर वर्मा ने कई बार बृजेश ठाकुर से कथित रूप से बातचीत की थी .

न्यायालय ने पिछले महीने सीबीआई को इस मामले की जांच में हुयी प्रगति की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया था .

इस मामले में आज सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि सीबीआई के अनुसार बृजेश ठाकुर एक प्रभावशाली व्यक्ति है और जेल में उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है . बृजेश ठाकुर इस समय न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है. 

पीठ ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि उसे बिहार की जेल में रखना उचित नहीं होगा .

न्यायालय ने इसके साथ ही बृजेश ठाकुर को नोटिस जारी कर यह पूछा कि क्यों नहीं उसकी हिरासत किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित कर दी जाये . 

पीठ ने कहा कि इस मामले की जांच कर रहे केन्द्रीय जांच ब्यूरो के दल में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाये। इस मामले में न्यायालय अब 30 अक्टूबर को आगे विचार करेगा .

इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रही अधिवक्ता अपर्णा भट ने कहा कि अभी तक 17 व्यक्ति गिरफ्तार किये गये हैं और जांच ब्यूरो की प्रगति रिपोर्ट में दिया गया विवरण ‘दु:खद’ है .

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘दुखद? यह बहुत ही दुखद है. बहुत ही भयभीत करने वाला है .’’ 

पीठ ने बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार से कहा, ‘‘यह बहुत ही पीड़ा दायक है. आपकी राज्य सरकार क्या कर रही है ?’’ 

जांच ब्यूरो की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया गया कि जेल में बृजेश ठाकुर के पास से मोबाइल बरामद हुआ है और वह जेल से ही 40 व्यक्तियों के साथ संपर्क में था .

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘उसे (ठाकुर) बिहार से बाहर स्थानांतरित करना होगा और दूसरी जेल में भेजना होगा. यह तमाशा है.’’ 

जांच ब्यूरो ने कहा कि इस मामले में नौ आरोपियों से जांच दल ने पूछताछ की है और इन सभी ने एक समान कहानी सुनाई है जिससे पता चलता है कि ठाकुर ने उन्हें ‘‘सिखाया पढ़ाया’’ है.

उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर का आश्रयगृह चार मंजिला इमारत में है और इसकी दीवारें 50 फुट ऊंची हैं जिनमें कोई झरोखा नहीं है और इसकी हालत जेल से भी बद्तर है.

उच्चतम न्यायालय ने बीते 18 सितंबर को इस मामले की जांच के लिए नई सीबीआई टीम गठित करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी.  शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि यह कदम न सिर्फ अभी चल रही जांच बल्कि पीड़ितों के लिए भी नुकसानदेह होगा.

न्यायालय ने कहा था कि सीबीआई निदेशक द्वारा गठित टीम बदलने की कोई वजह नहीं है और बीते 30 जुलाई को गठित की गई टीम को बरकरार रहने दिया जाए .

इससे पहले, पीठ ने कहा था कि जांच सही दिशा में बढ़ती दिख रही है . उसने आयकर विभाग को आश्रय गृह संचालित कर रहे एनजीओ और इसके मालिक बृजेश ठाकुर की संपत्तियों की जांच करने के भी निर्देश दिए थे. 

(इनपुट - भाषा से )

 

 

 

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