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दिल्ली की वायु गुणवत्ता के ‘बेहद गंभीर’ एवं ‘आपात’ श्रेणी में पहुंचने की आशंका

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही वायु गुणवत्ता ‘आपात’ श्रेणी के नजदीक जाती दिखी। पिछले 15 दिन में दूसरी बार शहर में प्रदूषण का इतना प्रकोप देखने को मिल रहा है।

स्कूलों के खुले होने की वजह से छात्रों के इसकी चपेट में आने की आशंका भी बढ़ गई है। स्कूली छात्रों की मास्क पहने और रुमाल से मुंह ढकने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर हर जगह फैली हैं।

कई लोगों ने शहर में खुले में कूड़ा जलाने, निर्माण अपशिष्ट और गंदगी के ढेरों की तस्वीरें भी साझा की हैं।

ट्विटर पर एक व्यक्ति ने लिखा, ‘‘ #दिल्लीप्रदूषण ऐसा विकासशील देश होने का क्या फायदा है जब हमारे बच्चे स्वच्छ हवा में सांस भी नहीं ले सकते.... किसी भी तरह की आपात स्थिति उत्पन्न होने से पहले जल्द से जल्द इसके उपायों पर गंभीरता से विचार करें।’’

कई लोगों ने सम-विषम योजना के प्रभाव पर भी सवाल उठाए।

अन्य एक व्यक्ति ने लिखा, ‘‘ ऐसे वातावरण में कौन जी सकता है जहां एक्यूआई, पीएम 2.5 .. 500 से पार है। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दोनों से पूछना चाहूंगा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है और सम-विषम योजना भी कारगर होती नहीं दिख रही।’’

दिल्ली में सुबह साढ़े 11 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 454 रहा। वहीं जहांगीरपुरी और रोहिणी सबसे अधिक प्रदूषित इलाके रहे जहां एक्यूआई 483 रहा। मुंडका और बवाना में एक्यूआई 479 रहा।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) क्रमश: 469 और 459 था। वहीं फरीदाबाद, गुरुग्राम गाजियाबाद में एक्यूआई क्रमश: 436 , 450 और 468 रहा।

सूचकांक (एक्यूआई) के बुधवार दोपहर बाद ‘बेहद गंभीर एवं आपात’ श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। अब तक यह ‘गंभीर’ श्रेणी में था।

गौरतलब है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 0-50 के बीच ‘अच्छा’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101-200 के बीच ‘मध्यम’, 201-300 के बीच ‘खराब’, 301-400 के बीच ‘अत्यंत खराब’, 401-500 के बीच ‘गंभीर’ और 500 के पार ‘बेहद गंभीर एवं आपात’ माना जाता है।

दिल्ली-एनसीआसर में पीएम 2.5 का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। वहीं पीएम 10 का स्तर बढ़कर 506 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि तापमान में गिरावट और हवा की गति बढ़ने से प्रदूषक तत्वों को जमा होने में मदद मिल रही है।

हरियाणा और पंजाब में पराली जलने में वृद्धि के कारण उत्तर-पश्चिमी हवाएं दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अधिक धुआं ला रही है।

सरकार की वायु गुणवत्ता निगरानी सेवा ‘सफर’ के अनुसार शहर में 22 प्रतिशत प्रदूषण पराली के जलने की वजह से है।
 

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