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दसॉल्ट पर ऑफसेट पार्टनर का ब्योरा साझा करने के लिए दबाव नहीं डाल सकते : निर्मला सीतारमण

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि भारत फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन पर राफेल सौदे से जुड़े ऑफसेट साझेदार का ब्योरा साझा करने के लिए सिर्फ इसलिए दबाव नहीं डाल सकती है क्योंकि विपक्ष इसके बारे में जानना चाहता है.

उन्होंने कहा दसॉल्ट, भारत के साथ समझौते के तहत ऑफसेट पार्टनर का ब्यौरा साझा करने के लिए बाध्य है लेकिन ऐसा करने के लिए एक साल का समय है. दसॉल्ट, राफेल लड़ाकू विमान सौदे में मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) है.

मंत्री ने वार्षिक ईटी अवार्ड में मुंबई में कहा, ‘‘केवल इसलिए कि कल मेरे विपक्षी इसके (ऑफसेट पार्टनर का ब्यौरा) बारे में जानना चाहते थे, मैं ओईएम पर यह कहकर दबाव नहीं डाल सकती कि विपक्ष यह चाहता है, मुझे अभी बताइये.’’

उन्होंने कहा, ‘‘नियम के मुताबिक, वे मुझे अगले साल भी बता सकते हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसके लिए इंतजार करूंगी. एक बार जान लूं, मैं आपको बता दूंगी. इससे पहले, खबरों के आधार पर मैं अटकलें क्यों लगाऊं?’’

यह भी पढ़ें - सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राफेल विमानों के दाम की जानकारी सार्वजनिक करने से किया इनकार

 इससे पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट  में बुधवार को 36 राफेल लड़ाकू विमानों के दाम के संबंध में जानकारी सार्वजनिक करने से इंकार किया और कहा था कि यह जानकारी सार्वजनिक होने का ‘‘हमारे विरोधी लाभ उठा सकते हैं.’’

सरकार द्वारा शीर्ष अदालत में राफेल सौदे के दामों की जानकारी सीलबंद लिफाफे में सौंपने के दो दिन बाद केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ के सामने राफेल विमानों के दाम से संबंधी गोपनीयता उपबंध का बचाव किया.

सरकार की इस दलील पर, पीठ ने कहा कि राफेल विमानों के दाम पर चर्चा केवल तभी हो सकती है जब इस सौदे के तथ्य जनता के सामने आने दिए जायें. पीठ ने कहा, ‘‘हमें यह निर्णय लेना होगा कि क्या कीमतों के तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं.’’ पीठ ने कहा कि तथ्यों को सार्वजनिक किए बगैर इसकी कीमतों पर किसी भी तरह की बहस का सवाल नहीं है.

(इनपुट - भाषा)

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