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बंगाल में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 77 हुआ, बुरी तरह से प्रभावित कुछ इलाकों में बिजली, मोबाइल सेवा बहाल

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

पश्चिम बंगाल में चक्रवात अम्फान के कारण जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 77 हो गई है जबकि प्रशासन क्षेत्र के सबसे प्रचंड तूफान के कारण प्रभावित हुए जन जीवन को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चक्रवात से मची तबाही की स्थिति का जायज़ा लेने पश्चिम बंगाल और ओडिशा रवाना हो गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के अलग अलग हिस्सों से बृहस्पतिवार रात से पांच और शव बरामद हुए हैं। इसके बाद राज्य में मृतकों की संख्या बढ़कर 77 हो गई है।

चक्रवात अम्फान ने राजधानी कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के करीब आधा दर्जन जिलों में बुधवार रात तबाही मचाई है। इसके प्रकोप से झुग्गियां उड़ गई, हजारों पेड़ गिर गए और निचले इलाकों में पानी भर गया। इस वजह से लाखों लोग बेघर हो गए।

राजधानी और उत्तर तथा दक्षिण 24 परगाना के कुछ हिस्सों में मोबाइल और बिजली सेवा को बहाल किया गया, लेकिन शहर का बड़ा हिस्सा अब भी बिजली के बिना रह रहा है, क्योंकि बिजली के खंभे गिर पड़े हैं और संचार लाइनें कट गई हैं।

सूत्रों ने बताया कि मोदी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ चक्रवात प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बृहस्पतिवार रात एक ट्वीट में कहा, " वह हवाई सर्वेक्षण करेंगे और समीक्षा बैठक में हिस्सा लेंगे, जहां राहत और पुनर्वास के पहलुओं पर चर्चा होगी।"

तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री राज्य के लिए आर्थिक पैकेज की मांग कर सकती हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, " कोविड-19 की स्थिति के दौरान, राज्य के पास कुछ नहीं आया। हमें उम्मीद है कि इस चक्रवात की वजह से केंद्र सरकार राजनीति को किनारे करेगी और राज्य को फिर से खड़ा करने के लिए सभी तरह की मदद देगी। "

बनर्जी ने बृहस्पतिवार को मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपये और प्रभावित इलाकों में प्राथमिक बहाली कार्य के लिए एक हजार करोड़ रुपये के कोष का ऐलान किया था।

अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता में 19, उत्तर 24 परगाना में 17, दक्षिण 24 परगाना-सुंदरबन क्षेत्र में 24 और बशीरहाट में 10 लोगों की मौत हुई है।

जिलों में राहत का काम शुरू किया गया है, जहां बेहसहारा लोग खाने और आश्रय के लिए कतारों में खड़े हैं, क्योंकि घर या तो उड़ गए हैं या बह गए हैं।

एनडीआरएफ और राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) की टीमें सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं।

केएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि कोलकाता के आसपास, पांच हजार से ज्यादा पेड़, सैकड़ों बिजली के खंभे, यातायात सिग्नल और पुलिस पोस्ट गिर गए।

कोलकाता के मेयर फरहाद हकीम ने बताया कि अब तक हजारों पेड़ हटाए जा चुके हैं। फिर भी, बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हमें उम्मीद है कि दो-तीन दिनों में हम स्थिति को सामान्य कर पाएंगे। फिलहाल लोग घरों में ही रहें।