प्रतीकात्मक तस्वीर/ PC-PTI
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कश्मीर में मुहर्रम का जुलूस रोकने के लिए कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

कश्मीर में मुहर्रम का जुलूस निकालने से रोकने के लिए शहर और घाटी के कई हिस्सों में कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं क्योंकि अधिकारियों को आशंका है कि बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से हिंसा भड़क सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि वाणिज्यिक केंद्र लाल चौक और आसपास के इलाकों के सभी प्रवेश द्वारों को कंटीले तारों से बंद कर दिया गया है और भारी संख्या में सुरक्षा कर्मी भी तैनात किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि घाटी में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती तौर पर कश्मीर के कई हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अधिकारियों ने प्रतिबंध लगाए जाने के लिए किसी कारण का हवाला नहीं दिया लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि मुहर्रम के जुलूस को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

मुहर्रम को इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का एक पाक महीना माना जाता है।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान केन्द्र सरकार द्वारा पांच अगस्त को हटाने के बाद से ही कश्मीर में प्रतिबंध लगे हैं। स्थिति बेहतर होने के बाद कई जगह से चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध हटाए भी जा रहे हैं।

अधिकारी हर शुक्रवार को संवेदनशील इलाकों में प्रतिबंध लगाते हैं। उनका कहना है कि निहित स्वार्थी तत्व बड़ी मस्जिदों तथा धार्मिक स्थलों पर अधिक संख्या में लोगों के इकट्ठे होने का फायदा उठा सकते हैं।

इस बीच अधिकारियों ने बताया कि घाटी में लगातार 37वें दिन बंद के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। बाजार तथा अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। साथ ही सार्वजनिक वाहन सड़कों से नदारद रहे।

शीर्ष एवं प्रमुख अलगाववादी नेता अब भी हिरासत में हैं जबकि पूर्व मुख्यमंत्रियों फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत मुख्यधारा के कई नेता या तो हिरासत में हैं या उन्हें नजरबंद रखा गया है।
 

इससे पहले जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार फारूक खान ने सोमवार को कहा कि प्रशासन ने अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों के समाप्त होने के बाद कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति को सफलतापूर्वक संभाला है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से अधिक समय में सुरक्षा बलों ने एक भी गोली नहीं चलाई है।

उन्होंने पाकिस्तान पर झूठा प्रचार करने का भी आरोप लगाया।

खान ने कहा कि कश्मीर में उठाये गये सभी कदमों का उद्देश्य लोगों के जीवन की सुरक्षा करना है और घाटी में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम (लोगों की सुरक्षा में) सफल रहे हैं। एक महीने से अधिक समय गुजर गया, लेकिन कानून व्यवस्था के हालात से निपटने के लिए सुरक्षा बलों और पुलिस की ओर से एक भी गोली नहीं चलाई गयी। यह बड़ी बात है। यह हकीकत है।’’

उनका बयान ऐसे दिन आया है जब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैचलेट ने कश्मीर में पाबंदियों पर चिंता जताते हुए भारत से इसमें ढील देने को कहा है।

मानवाधिकार परिषद के 42वें सत्र में अपने शुरूआती वक्तव्य में बैचलेट ने भारत और पाकिस्तान दोनों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कश्मीरी जनता के मानवाधिकारों का सम्मान और संरक्षण किया जाए।

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