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संसद अगले हफ्ते नागरिकता विधेयक पर चर्चा करेगी, कांग्रेस करेगी विरोध

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

विपक्ष के कड़े विरोध की परवाह नहीं करते हुए विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक नौ दिसंबर को लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है। वहीं, अगले दिन इसे सदन में चर्चा और पारित कराए जाने के लिये लिया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इस विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी।

यह विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर आए उन गैर मुसलमानों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है, जिन्होंने वहां धार्मिक उत्पीड़न झेला है।

इस विधेयक का संसद के निचले सदन में पारित होना लगभग तय है कि क्योंकि वहां भाजपा और उसके सहयोगी दल के पास प्रचंड बहुमत है।

केंद्र सरकार बीजद और टीआरएस जैसे क्षेत्रीय दलों के समर्थन से इस विधेयक के राज्यसभा में पारित होने के प्रति भी आश्वस्त है। इन पार्टियों ने अतीत में अक्सर ही सत्तारूढ़ दल का संसद में साथ दिया है। हालांकि, विधेयक का कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसी (भाजपा की) सख्त विरोधी पार्टियों ने जोरदार विरोध करते हुए दावा किया है कि नागरिकता धर्म के आधार पर नहीं दी जा सकती।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार ने बृहस्पतिवार को कार्य मंत्रणा समिति में विभिन्न दलों के नेताओं को सूचित किया कि वह मंगलवार को निचले सदन में इस विधेयक को चर्चा के लिए लाएगी।

सरकार की ओर से नागरिकता संशोधन विधेयक संसद में पेश किए जाने की तैयारी के बीच कांग्रेस ने इस मुद्दे पर रणनीति तय करने के लिए बृहस्पतिवार को प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की।

इस विधेयक को विभाजनकारी और भेदभावपूर्ण करार देने वाली कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट कर दिया कि वह संसद में इसका विरोध करेगी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल में कहा कि उनकी पार्टी नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस इस देश में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ किसी तरह के भेदभाव के खिलाफ है।’’

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति किसी भारतीय के खिलाफ भेदभाव करे, तो हम उसके खिलाफ है...यह हमारा रुख है। हमारा मानना है कि भारत हर किसी का है--सभी समुदायों, सभी धर्मों, सभी संस्कृतियों । ’’ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने संसद भवन परिसर में विपक्ष के नेताओं के साथ बैठक कर नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर रणनीति पर चर्चा की।

बैठक में तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आम आदमी पार्टी और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल थे।

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों लोगों को देश के दूसरे हिस्सों से बाहर करने के मकसद से ला रही है।

कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी रणनीति तय करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगी तथा समान विचारधारा वाले दलों के साथ भी चर्चा होगी।

उधर, लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती ने एक बयान में कहा, 'केन्द्र सरकार द्वारा काफी जल्दबाजी में लाया गया नागरिकता संशोधन विधेयक पूरी तरह विभाजनकारी और असंवैधानिक विधेयक है।’’

उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर नागरिकता देना तथा इस आधार पर नागरिकों में भेदभाव पैदा करना डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी एवं धर्मनिरपेक्ष संविधान की मंशा और बुनियादी ढांचे के बिल्कुल खिलाफ उठाया गया कदम है।

उन्होंने कहा कि नोटबन्दी और जीएसटी की तरह ही नागरिकता संशोधन विधेयक को देश पर जबर्दस्ती थोपने की बजाय केन्द्र सरकार को पुनर्विचार करना चाहिये और बेहतर विचार-विमर्श के लिए इसे संसदीय समिति के पास भेजना चाहिये, ताकि यह विधेयक संवैधानिक रूप में देश की जनता के सामने आ सके।

इस विधेयक के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस भी है। लंबे समय तक भाजपा की सहयोगी पार्टी रही शिवसेना अब विपक्षी खेमे में है। विधेयक पर शिवसेना के रुख पर भी नजरें टिकी होंगी क्योंकि यह इस विधेयक की पुरजोर समर्थक रही है लेकिन अब उसने कांग्रेस और राकांपा से हाथ मिला लिया है।

वहीं, भाकपा ने इस विधेयक से देश के संविधान में प्रदत्त भारतीय नागरिकता के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप में पूरी तरह से बदलाव आने का दावा किया है।

भाकपा ने प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक के दूरगामी प्रभाव के बारे में नयी दिल्ली में एक बयान जारी कर कहा कि धार्मिक आधार पर नागरिकता देने से जुड़े इस विधेयक को सरकार संसद के मौजूदा सत्र में पेश करना चाहती है, यह सही नहीं है।

पार्टी ने कहा, ‘‘नागरिकता कानून में प्रस्तावित बदलाव संविधान निर्माताओं द्वारा प्रदत्त भारतीय नागरिकता के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को पूरी तरह से बदल कर भाजपा आरएसएस द्वारा तैयार किये गये ‘बहुसंख्यकवादी डिजाइन’ में तब्दील कर देगा।’’ पार्टी ने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार अपनी नाकामी को छुपाने और वास्तविक मुद्दों से देशवासियों का ध्यान भटकाने के लिये इस प्रकार के मुद्दों को आगे बढ़ा रही है।

हालांकि, भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा कि विधेयक पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता है।

विधेयक का विरोध करने वालों की आलोचना करते हुए राम माधव ने कहा कि यह विधेयक पिछली लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन राज्यसभा में नहीं आ पाया और इसकी मियाद समाप्त हो गई थी ।

माधव ने ट्वीट किया, ‘‘ संशोधित विधेयक आ रहा है । ’’ उन्होंने कहा कि यह पड़ोस (के देश) में उत्पीड़न के शिकार हुए लोगों को आश्रय देने की भारतीय परंपरा के अनुरूप है।


 

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