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कांग्रेसी नेता कुलदीप विश्नोई का 150 करोड़ रुपये का ‘बेनामी होटल’ जब्त

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

आयकर विभाग ने हरियाणा के कांग्रेसी नेता कुलदीप बिश्नोई और उनके भाई के गुड़गांव स्थित एक होटल को ‘बेनामी’ संपत्ति के तौर पर जब्त कर लिया है। यह एक महंगे व्यावसायिक इलके में है और इसकी कीमत 150 करोड़ रुपए आंकी गयी है। वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों के यह कार्रवाई बेनामी संपत्ति लेनदेन (निषेध) अधिनियम 1988 की धारा 24(3) के तहत की गयी है। पीटीआई-भाषा द्वारा देखे गए आदेश-पत्र के मुताबिक जब्त की गयी संपत्ति ब्राइट स्टार होटल प्राइवेट लिमिटेड के नाम है।

विभाग ने कर-अपवंचन के आरोप में जांच के सिलसिले में 23 जुलाई को हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में बिश्नोई से जुड़े 13 ठिकानों पर छापे डाले थे। आयकर सूत्रों के बताया कि जांच में सामने आया है कि जब्त की गयी कंपनी में 34 प्रतिशत शेयर एक ‘दिखावे की’ कंपनी के नाम है जो करचोरों की पनाहगाह माने जाने वाले विदेशी क्षेत्र ‘ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड’ में पंजीकृत है और उसका परिचालन संयुक्त अरब अमीरात से हो रहा था।

उन्होंने कहा कि होटल का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी तथा उसके स्वामित्व वाली होटल की अचल सम्पत्तियां ‘कुलदीप बिश्नोई और चंद्र मोहन (बिश्नोई के भाई) की बेनामी संपत्तियां हैं।’

बेनामी संपत्ति उन्हें कहा जाता है जिसका वास्तविक लाभार्थी वह नहीं होता जिसके नाम पर वह पंजीकृत होती है।

दोनों भाई हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत नेता भजन लाल के बेटे हैं। बिश्नोई आदमपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं। जबकि मोहन राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

सूत्रों ने बताया कि ब्राइट स्टार होटल प्राइवेट लिमिटेड में बेनामी शेयरधारक बिश्नोई परिवार के ‘बेहद निकट संबंधी’ हैं।

उन्होंने कहा कि कंपनी पर नियंत्रण बिश्नोई के पास है और ब्राइट स्टार होटल प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीदने के लिए पैसे के प्रबंध भी बिश्नोई ने किया।

विभाग ने अपने आदेश में आरोप लगाया है कि मूल तौर पर कंपनी का परिचालन बिश्नोई बंधु अपने देश और विदेश के सहयोगियों के साथ मिलकर कर रहे हैं।

छापे के बाद आयकर विभाग ने आधिकारिक बयान में कहा था कि बिश्नोई और उसके परिवार से जुड़ी 200 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी संपत्ति उसकी जांच के दायरे में है।

बेनामी संपत्ति कानून 1988 में बनकर तैयार हो गया था लेकिन इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने नवंबर 2016 में लागू किया। इस कानून में सश्रम कारावास समेत सात साल तक की सजा और संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 25 प्रतिशत तक का जुर्माने का प्रावधान है।

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