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कांग्रेस ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- 'संविधान से किया खिलवाड़'

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

जम्मू कश्मीर के चुनावी मैदान में सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले कहा है. राज्य विधानसभा को भंग करने के राज्यपाल के फैसले पर पीडीपी, एनसी और कांग्रेस एक के बाद एक सवाल खड़ा कर रहे हैं. इसी बीच कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर संविधान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है. 

कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग किए जाने के मामले में राज्यपाल सत्यपाल मलिक की कड़ी आलोचना करते हुए इस मामले में प्रधानमंत्री और PMO पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने इसे देश के संविधान के साथ खिलवाड़ बताया है.

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में जिस तरह के असंवैधानिक अनैतिक और अनुचित कार्य को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने अंजाम दिया है हम उसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं.’’ 

तिवारी ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल मलिक ने भारत के संविधान के साथ खिलवाड़ किया है और यं सीधा सीधा प्रधानमंत्री और PMO के इशारों पर हुआ है.

गौरतलब है कि बुधवार की रात राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य विधानसभा को भंग कर दिया था. जिसके कुछ ही देर पहले पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गठबंधन कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था. इस गठबंधन में पीडीपी, एनसी और कांग्रेस शामिल है. राज्य में पीडीपी और भाजपा गठबंधन टूटने के बाद राज्यपाल शासन लागू हुआ था. जिसकी छह महीने की अवधि 19 दिसंबर को पूरी हो रही है.

राज्यपाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हम जम्मू कश्मीर के राज्यपाल से पूछना चाहते हैं कि छह महीने पहले जब पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार थी तब पीडीपी ने अपना समर्थन वापस लिया उस समय विधानसभा क्यों नहीं भंग की गई थी?’’ 

तिवारी के मुताबिक BJP ने पिछले पांच-छह महीनों में कई राजनीतिक दलों के विधायकों को तोड़ने और लुभाने की पूरी कोशिश की लेकिन उसका ये षडयंत्र पूरी तरह विफल रहा. ये साफ हो गया कि बीजेपी को कोई राजनीतिक दल, कोई विधायक समर्थन देने को तैयार नहीं है.

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘कुछ विधायकों ने ये पहल की कि जम्मू कश्मीर में दोबारा से लोकप्रिय सरकार बने. पीडीपी, नेशनल कांफ्रेस और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और ये तय किया कि हम समर्थन देने पर विचार करेंगे. जब ये बात राज्यपाल के जहन में लाई गई, पीडीपी की ओर से उनको खत लिखा गया तो राज्यपाल कह रहे हैं कि मेरी फैक्स मशीन नहीं चल रही. और आनन फानन में जो विधानसभा छह महीने निलंबित चल रही थी. उसे भंग कर दिया गया.’’ 

हालांकि राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा, 'हां ये सत्ता में आने के लिए हो रहा था .. इनकी पार्टी न टूट जाए इसकी वजह से ये गठबंधन हुआ. महबूबा मुफ्ती और अब्दुल्ला यही चाहते थे..कल ईद थी.. ऑफिस बंद था.. मुझे 10 दिनों से रिपोर्ट आ रही थी.. समस्या काफी जटिल हो गई थी.. बड़े पैमाने पर रुपया ऑफर किया जा रहा है .. लोगों को डराया जा रहा है.. किसी को आतंकवादी धमकियां दी जा रही हैं.'

वहीं अब देखने वाली बात होगी की जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव क्या लोकसभा चुनाव के साथ होते हैं या फिर राज्य में राज्यपाल शासन ही लागू रहता है. 

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