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अयोध्या मामला: प्रधान न्यायाधीश ने विदेश यात्रा रद्द की

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

 प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा अपनी विदेश यात्रा रद्द किए जाने की खबर है। उन्हें आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होने विदेश जाना था।

सूत्रों ने बुधवार को बताया कि अयोध्या भूमि विवाद मामले में पीठ का नेतृत्व करने वाले गोगोई ने कुछ अनिवार्यताओं के चलते अपनी विदेश यात्रा को रद्द कर दिया है।

गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने अयोध्या मामले में आज सुनवाई पूरी करने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।

प्रधान न्यायाधीश को 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने से पहले कुछ दक्षिण अमेरिकी देशों, मध्य पूर्व और कुछ अन्य देशों की यात्रा पर जाना था।

सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधान न्यायाधीश ने प्रस्तावित विदेश यात्राओं को अंतिम रूप मिलने से पहले इन्हें रद्द कर दिया।

गोगोई ने पिछले साल तीन अक्टूबर को भारत के 46वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

इधर राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में लंबी सुनवाई पूरी होने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सदस्य ‘चैम्बर में’’ बैठेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने इस बारे में एक नोटिस जारी कर कहा है कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और चार अन्य न्यायाधीश चैम्बरों में बैठेंगे, जहां मामले से संबद्ध पक्षों को जाने की इजाजत नहीं होगी।

नोटिस में कहा गया है, ‘‘यह ध्यान रखें कि बृहस्पतिवार 17 अक्टूबर को प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर चैम्बरों में बैठेंगे।’’

शीर्ष न्यायालय ने अयोध्या मामले में सुनवाई बुधवार को पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित रख लिया।

संविधान पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर छह अगस्त से रोजाना 40 दिन तक सुनवाई की। इस दौरान विभिन्न पक्षों ने अपनी अपनी दलीलें पेश कीं।

संविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुये संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिये तीन दिन का समय दिया।

इस मामले में दशहरा अवकाश के बाद 14 अक्टूबर से अंतिम चरण की सुनवाई शुरू हुयी। न्यायालय के पहले के कार्यक्रम के तहत यह सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी की जानी थी। हालांकि, 14 अक्टूबर को सुनवाई शुरू होने पर न्यायालय ने कहा कि यह 17 अक्ट्रबर तक पूरी की जायेगी। लेकिन 15 अक्टूबर को पीठ ने यह समय सीमा घटाकर 16 अक्टूबर कर दी थी।

राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इस मुद्दे पर 17 नवंबर से पहले ही फैसला आने की उम्मीद है क्योंकि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई इस दिन सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

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