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आतंक के अजगर को फिर चीन ने बचाया, यहां पढ़ें: मसूद अजहर का काला इतिहास

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

आतंक के मददगार चीन ने एक बार फिर चालाबाजी की है। चीन ने अपने वीटो का इस्तेमाल कर मसूद अजहर के खिलाफ प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया। चीन की काली करतूत से आतंक का सरगना एक बार फिर बच गया। मसूद अजहर ग्लोबल आतंकी घोषित नहीं हो पाया।

'आतंक के अजगर' को बचाने के लिए चीन चाहें जितना भी हमदर्दी क्यों न दिखा ले लेकिन आतंक के खिलाफ हिंदुस्तान की जंग जारी रहेगी। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आका मसूद अजहर के पाप और काले इतिहास का पूरा चिट्ठा रिपब्लिक भारत के पास मौजूद है।

आपको पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड आतंकी मसूद अजहर का काला इतिहास बताते हैं।

मसूद अजहर का काला इतिहास

  • जैश ए मोहम्मद का संस्थापक
  • 1968 में पाकिस्तान के बहावलपुर में जन्म
  • 11 भाई-बहनों में 10वें नंबर पर
  • पिता सरकारी स्कूल में हेडमास्टर 
  • परिवार डेयरी का कारोबार करता था
  • कराची: जामिया उलूम अल इस्लामिया से पढ़ाई
  • आतंकी संगठन हरकत-उल अंसार से संबंध 
  • पहली बार 1994 में श्रीनगर से गिरफ्तार

उपर दिए गए जानकारी से ये साफ है कि साल 1968 में पैदा हुआ अजगर अपने 11 भाई बहनों में 10वें नंबर पर था। पिता सरकारी स्कूल में प्रिसिंपल थे, लेकिन क्या मालूम था कि ये मसूद आतंक का प्रिंसिपल बन जाएगा। परिवार डेयरी का कारोबार करता था और आज ये दुनिया भर में आतंक का ज़हर घोलने का काम करता है।

हिंदुस्तान की धरती पर अपने नापाक मंसूबे को एक-दो बार नहीं कई दफा अंजाम देने वाला आतंकी मसूद ने पाप की सीढ़ियां बना रखी है। यहां पढ़ें, 

मसूद अजहर के पाप

  • 2001: संसद पर हमले का जिम्मेदार
  • संसद हमले में नौ सुरक्षाकर्मी शहीद

  • 2016: उरी हमले का मास्टरमाइंड
  • सेना के कैंप पर आतंकी हमला 
  • आतंकी हमले में 19 जवान शहीद

  • पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड
  • एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकी हमला
  • आतंकी हमले में 7 जवान शहीद

  • 14 फरवरी: पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड
  • CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला
  • हमले में 40 CRPF जवान शहीद

लेकिन इन सभी बातों के बीच सवाल ये उठता है कि जब आतंक का दंश सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया झेल रहा है तो फिर चीन ने बार-बार मसूद के बैन पर अडंगा क्यों लगाया?

मसूद को चीन ने क्यों बचाया?

दरअसर चीन पाकिस्तान के ग्वादरपोर्ट तक CPEC बना रहा है, इन इलाकों में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप मौजूद हैं। और पाक चरमपंथियों को चीन का समर्थन हासिल है। और सबसे खास बात तो ये है कि दक्षिण एशिया में चीन का सबसे करीबी देश पाकिस्तान है। इसलिए चीन हमेशा ही पाक का हितैषी बनकर सामने आता है, चाहें वो आंतक के समर्थन का मुद्दा ही क्यों न हो।

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