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राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलकर बोले उमर, 'जम्मू-कश्मीर पर संसद में आश्वासन दे मोदी सरकार'

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उनकी पार्टी को भरोसा दिलाया दिया है कि संविधान के ‘‘अनुच्छेद 370 और 35 ए’’ को रद्द किए जाने या राज्य को तीन हिस्सों में बांटने जैसा कदम उठाने की कोई योजना नहीं है। 

हालांकि, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इन मुद्दों पर सोमवार को संसद में केंद्र का आश्वासन चाहते हैं क्योंकि जम्मू कश्मीर पर राज्यपाल अंतिम प्राधिकार नहीं हैं। 

उमर और उनकी पार्टी के कुछ सहकर्मी इन मुद्दों को लेकर शनिवार को राज्यपाल से मिले।

नेकां नेता ने यहां संवाददाताओं से कहा, “उन्होंने (राज्यपाल ने) हमें भरोसा दिलाया है कि अनुच्छेद 370 या अनुच्छेद 35 ए (रद्द करने पर) या परिसीमन (राज्य के निर्वाचन क्षेत्रों की) पर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।” 

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बैठक के बाद राज्यपाल ने भी एक बयान जारी कर कहा कि राज्य को संवैधानिक प्रावधानों में किसी बदलाव की कोई जानकारी नहीं है और यह आश्वस्त किया कि अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती सुरक्षा कारणों को लेकर की गई है। 

उमर ने कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी के सांसदों को सोमवार को संसद में एक प्रस्ताव पेश कर जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ हफ्तों में बनी स्थिति पर केंद्र सरकार का बयान मांगने को कहा है। 

केंद्र सरकार ने अमरनाथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को गुरुवार को अपनी यात्रा में कटौती करने और यथाशीघ्र लौट जाने को कहा था। यह परामर्श तीर्थयात्रियों पर आतंकी हमले की सेना द्वारा आशंका जताए जाने के बाद जारी किया गया था। इसके एक दिन बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की है। 

उन्होंने कहा, “हम राज्य की स्थिति पर सरकार की तरफ से भी सोमवार को संसद में एक बयान चाहते हैं, जिसमें यह बताया जाए कि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को यहां से जाने के आदेश देने की जरूरत क्यों पड़ी। हम संसद से यह सुनना चाहते हैं कि यहां लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।” 

उन्होंने कहा, “राज्यपाल ने हमें भरोसा दिलाया है लेकिन जम्मू कश्मीर पर राज्यपाल अंतिम प्राधिकार नहीं हैं। जम्मू कश्मीर पर अंतिम प्राधिकार भारत सरकार है। अब हम संसद में भारत सरकार से सुनना चाहते हैं कि जम्मू कश्मीर पर उसकी मंशा क्या है और यहां की स्थिति के बारे में उनका क्या आकलन है।”

नेकां नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने पिछली बार लोकसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिये यह मुद्दा उठाया था लेकिन “मैं उनसे अनुरोध करूंगा कि सोमवार को एक और नोटिस देकर इस मुद्दे को फिर से उठाएं। हम इस पर सरकार से जवाब लेने की कोशिश करेंगे।” 

पार्टी प्रतिनिधिमंडल के गुरुवार को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे लोग मुलाकात के बाद संतुष्ट थे क्योंकि खतरे की आशंका के कोई संकेत नहीं थे, जिसके चलते अमरनाथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को घाटी से बाहर जाने के आदेश देने पड़े। 

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने राज्यपाल के आश्वासन के संदर्भ में बात की। उन्होंने कहा कि वह जम्मू कश्मीर में चुनाव चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह राज्य में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं चाहते। वह इस बात से संतुष्ट थे कि यह वर्ष पिछले बरसों की तुलना में बेहतर है। हम बैठक के बाद संतुष्ट होकर निकले थे लेकिन हमें 24 घंटों के अंदर ही ऐसे आदेश (तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को निकालने) की उम्मीद नहीं थी।”

उमर ने उम्मीद जताई कि केंद्र यह समझेगा कि “अशांत, तनावपूर्ण और अस्थिर” जम्मू कश्मीर उसके हित में नहीं है। 

उमर ने कहा कि भारत सरकार जो कुछ कहेगी वह तनाव दूर करने में मदद करेगी। 

उन्होंने कहा, ‘‘इस राज्य को और यहां के लोगों को किये वादों को अनंतकाल तक के लिए बरकरार रखना होगा। ये समयबद्ध आश्वासन नहीं थे...हमें कुछ खास शर्तों पर विलय (भारत में) और 70 बरसों के बाद इसमें बदलाव किये जाने के बारे में नहीं कहा गया था।’’ 

उन्होंने राज्य के लोगों से शांति बनाए रखने और अपनी भावनाओं पर काबू रखने कहा। साथ ही, निहित स्वार्थ वाले लोगों के मकसद को पूरा करने वाला कोई कदम नहीं उठाने की भी अपील की। 

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग शायद चाहते हैं कि हम कानून अपने हाथों में ले लें या हम सड़कों पर उतर जाएं या माहौल खराब करें, ताकि उनका मंसूबा पूरा हो जाए। लेकिन हमें उन्हें सफल होने का कोई अवसर नहीं देना चाहिए।’’ 

राजभवन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि इस तरह के सुरक्षा हालात बन गए, जिसमें तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत थी। 

राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को बताया, “सुरक्षा बलों के पास अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमलों के संदर्भ में पुख्ता जानकारी थी। पाकिस्तान की तरफ से एलओसी पर भारी गोलाबारी हो रही थी, जिसका प्रभावी तरीके से सेना जवाब दे रही है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की जरूरत थी।” 
 

(इनपुट - भाषा)

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