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CBI मुख्यालय में पॉजिटिव​​​​​​​ वातावरण लाने के लिए श्री श्री रविशंकर की Art Of Living कराएगी वर्कशॉप

Written By Gaurav Kumar | Mumbai | Published:

हाल के दिनों में देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में मचे घमासान से पूरा देश सन्न रह रह गया था. CBI के नंबर एक अधिकारी आलोक वर्मा और नंबर दो के अधिकारी राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. वहीं अब जांच एजेंसी 'CBI' के अधिकारियों में सकारात्मकता वातावरण फिर से बहाल करने को लेकर श्री श्री रवि शंकर के आर्ट ऑफ लिविंग ट्रस्ट एक वर्कशॉप आयोजित करेगी.

इस वर्कशॉप का मकसद देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी (CBI) के अधिकारियों में पॉजिटिव वातावरण उत्पन्न करना, ऊर्जा और अधिकारियों को प्रोत्साहित करना है. बता दें, ये वर्कशॉप 10 नवंबर से 12 नवंबर तक तीन दिनों तक चलेगी. वहीं CBI के लगभग 150 अलग-अलग रैंक के ऑफिसर इस वर्कशॉप में भाग लेंगे. ये पूरा कार्यक्रम दिल्ली स्थित सीबीआई के हेडक्वार्टर में आयोजित होगा.

बता दें, आर्ट ऑफ लिविंग के द्वारा देश और दुनियाभर में कई वर्कशॉप कराए जाते हैं. भारी तादात में लोग शांति के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के वर्कशॉप का रुख करते हैं. ये ट्रस्ट लोगों में काफी पॉपुलर भी है.

क्या है CBIvsCBI की गुत्थी -

बता दें, सीबीआई के दो अधिकारियों के बढ़ती तनातनी को लेकर केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों ही अधिकारियों को तत्काल छुट्टी पर भेज दिया था और एम नागेश्वर को CBI का अंतरिम डायरेक्टर नियुक्त किया गया था. वहीं इस पूरे मामले पर आलोक वर्मा ने छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. जिसके बाद कोर्ट की तरफ से उन्हें राहत नहीं मिली थी. 

कोर्ट ने इस पूरे विवाद पर कहा था कि CVC पूर्व जज के नेतृत्व में 14 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपे. वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को राफेल डील विवाद की जांच से जोड़कर देख रहा है. विपक्ष का कहना है कि आलोक वर्मा राफेल की जांच करने वाले थे जिसके कारण उन्हें उनके पद से हटाकर छुट्टी पर भेज दिया गया है.

बता दें, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सकारात्मक बताया था. उन्होंने कहा था कि सीबीआई विवाद में सच्चाई का बाहर आना देश के हित में जरूरी है. सीबीआई में हाल में हुए घटनाक्रम से उसकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार ने इस पूरे मामले में जो कदम उठाए हैं. सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन्हें बल देता है.

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