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सीबीआई के DSP देवेंद्र कुमार ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ किया दिल्ली HC का रुख, थोड़ी देर में होगी सुनवाई...

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने जांच एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से जुड़े रिश्वतखोरी के आरोपों के संबंध में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया. वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन ने मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन अैर न्यायमूर्ति वी के राव की पीठ के समक्ष यह मामला पेश किया.

अदालत ने कुमार की याचिका को सुनवाई के लिए मंगलवार को दोपहर के भोजन के बाद उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया.

 

मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले में जांच अधिकारी रहे कुमार को सीबीआई ने कल गिरफ्तार किया. उन पर कारोबारी सतीश साना के बयान दर्ज करने में धोखाधड़ी के आरोप हैं. साना ने आरोप लगाया था कि उन्होंने इस मामले में राहत पाने के लिए रिश्वत दी थी.

गौरतलब है कि सीबीआई ने राकेश अस्थाना से जुड़े रिश्वत आरोपों के सिलसिले में अपने पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया था.

अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने रविवार की शाम उनके कार्यालय तथा आवास पर छापे मारे थे. एजेंसी का दावा है कि मोबाइल फोन और आईपैड बरामद किए गए हैं जिनका विश्लेषण किया जा रहा है.

एजेंसी ने एक अभूतपूर्व कदम के तहत अपने विशेष निदेशक अस्थाना के खिलाफ रिश्वत का मामला दर्ज किया है.

आरोप है कि अस्थाना ने पांच करोड़ रूपए की रिश्वत के बदले कारोबारी सतीश सना को राहत प्रदान की थी. रिश्वत की राशि बिचौलिए मनोज प्रसाद ने प्राप्त की थी.

अस्थाना और सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का एक दूसरे से विवाद चल रहा है और दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए हैं. प्रसाद को 16 अक्टूबर 2018 को भारत आने पर गिरफ्तार किया गया था.

यह मामला सीबीआई के एक अधिकारी को सौंपा गया है जिनके खिलाफ अस्थाना ने आरोप लगाए हैं. कुमार मांस निर्यातक मोइन कुरैशी से जुड़े मामले में जांच अधिकारी थे. उन्हें सतीश सना का बयान दर्ज करने में फर्जीवाड़े के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. अधिकारियों के अनुसार सना ने मामले में राहत पाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी थी.

उन्होंने दावा किया, ऐसा आरोप है कि सना का बयान कथित तौर पर 26 सितंबर 2018 को अस्थाना के नेतृत्व वाली जांच टीम द्वारा दर्ज किया गया. लेकिन सीबीआई जांच में यह बात सामने आयी कि वह उस दिन हैदराबाद में था.

एजेंसी ने कहा कि होटल बिल आदि के रूप में साक्ष्य है कि सना उस दिन हैदराबाद में था. सना ने अपने बयान में कथित तौर पर कहा है कि उसने इस साल जून में तेदेपा के राज्यसभा सदस्य सी एम रमेश के साथ अपने मामले पर चर्चा की थी और उन्होंने सीबीआई निदेशक से बातचीत कर सना को आश्वासन दिया था कि उसे फिर से समन नहीं किया जाएगा.

सना ने संभवत कहा है, ‘‘जून के बाद से, सीबीआई ने मुझे नहीं बुलाया. मैं यह मान रहा था कि मेरे खिलाफ जांच पूरी हो गयी है.’’

सीबीआई ने अब आरोप लगाया है कि कुमार ने उसके बयान में हेरफेर किया था कि ताकि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ अस्थाना द्वारा सीवीसी में लगाए गए निराधार आरोपों की पुष्टि हो सके.

अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी अस्थाना नीत विशेष जांच दल के अन्य सदस्यों की कथित भूमिका की भी जांच कर रही है.

अस्थाना ने 24 अगस्त 2018 को सीबीआई निदेशक वर्मा के खिलाफ शिकायत की थी कि उन्होंने सना से दो करोड़ रूपए की रिश्वत ली थी ताकि उसे मामले में राहत दी जा सके.

(इनपुट- भाषा से भी)

 

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