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केंद्र का ऐतिहासिक फैसला, डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब तक गलियारे को मिली मंजूरी

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब तक एक गलियारे को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला हुआ है. केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब तक एक गलियारा खोलने को मंजूरी दे दी है. इसकी जानकारी देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दी है. 

मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट करके ये जानकारी देते हुए कहा, 'ऐतिहासिक फैसले की कड़ी में कैबिनेट ने गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक एक गलियारे के निर्माण और उसके विकास को मंजूरी दे दी है. केंद्र सरकार के वित्त पोषण के साथ सभी आधुनिक सुविधाओं रहित करतारपुर गलियारा परियोजना लागू की जाएगी.'

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ये जानकारी भी दी कि इसके संबंध में पाकिस्तान सरकार से उनके क्षेत्र में उपयुक्त सुविधाओं के साथ गलियारे का सहारा देने और विकसित करने की अपील की जाएगी. 

दरअसल कई वर्षों से डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब तक एक गलियारे की मांग हो रही थी. हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसके लिए भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को एक चिट्ठी लिखी थी. चिट्ठी में उन्होंने सुषमा स्वराज से पाकिस्तान सरकार के समक्ष डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब तक एक गलियारा खोलने का मुद्दा उठाने की अपील की थी.

इस चिट्ठी में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिला स्थित करतारपुर साहिब सिखों के लिए बेहद पवित्र स्थल है क्योंकि गुरु नानक ने अपने जीवन का अधिकतर समय वहां बिताया है. ये गुरुद्वारा गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक के चार किलोमीटर पश्चिम में स्थित है. 

इसके अलावा हाल ही में कांग्रेस नेता और सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने भी डेरा बाबा नानक करतारपुर साहिब कॉरिडोर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. जिसमें प्रताप सिंह बाजवा ने पाकिस्तान के साथ एक बार फिर से बातचीत करने की वकालत की थी. 

पीएम मोदी को भेजे हुए अपने पत्र में बजवा ने लिखा था कि 'साल 1962 में एक ऐतिहासिक डील हुई थी जिसमें हमने अपने हिस्से को देकर उस समय पाकिस्तान में आने वाला हुसैनीवाला बार्डर को पंजाब में मिला लिया था. हुसैनीवाला बार्डर में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधि है.. आप सिखों के प्रति अपने कमिटमेंट को दिखाइए'. प्रताप सिंह बाजवा ने चिट्ठी में लिखा था कि अगले साल गुरु नानक जी की 550वीं जयंती है. देश के विभाजन के बाद सिख कभी भी करतारपुर साहिब जाकर अच्छे से उनकी जयंती मना नहीं सके हैं. बता दें, करतारपुर साहिब में गुरुनानक जी ने लगभग 18 साल गुजारे थे.

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