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लद्दाख से भाजपा सांसद ने अपरिभाषित एलएसी को चीन के साथ टकराव की वजह बताया

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

 लद्दाख से सांसद जमयांग शेरिंग नामग्याल ने कहा कि सीमा पर टकराव को टालने के लिए भारत और चीन को साथ बैठकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को उचित तरीके से निर्धारित करने की जरूरत है।

सीमा पर इस सप्ताह की शुरुआत में आई तनाव की खबरों को ‘चिंताजनक नहीं’ बताते हुए भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘हमें ऐसी घटनाओं के बारे में ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए।’’

एलएसी पर अक्सर एशिया के दो बड़े देशों की सेनाओं के बीच झड़प होती रहती है। दोनों के क्षेत्र को लेकर अलग-अलग दावे हैं।

नामग्याल ने गत शाम पत्रकारों से कहा, ‘‘हमारी सीमा पर असली दिक्कत यह है कि सीमा को सही तरीके से परिभाषित नहीं किया गया है जिसके कारण चीन को कुछ और लगता है और हमें कुछ और। वास्तविक नियंत्रण रेखा निर्धारित नहीं है और उसका उचित तरीके से सीमांकन नहीं होने के कारण ऐसी दिक्कतें बार-बार पैदा होती हैं।’’

उन्होंने बताया कि गायें और अन्य पशु सीमा के पार चले जाते हैं जिससे स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा हो जाता है।

अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने के केंद्र के कदम का समर्थन करते हुए लोकसभा में अपने भाषण से सुर्खियों में आए भाजपा सांसद ने दावा किया कि 2014 से जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए हैं तब से चीन किसी भी भूमि पर दावा नहीं कर पाया है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग नये केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे से बहुत खुश हैं।

कई स्थानों पर असंतोष के कुछ पोस्टरों के बारे में पूछे जाने पर नामग्याल ने ऐसी किसी तरह की भावना या पोस्टर होने से इनकार किया।

उन्होंने लद्दाख में मेडिकल कॉलेज की घोषणा करने के लिए मोदी सरकार का आभार भी जताया।

इधर गृह, विधि और आदिवासी मामलों के मंत्रालय तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) लद्दाख के लिए ‘‘आदिवासी इलाके’’ के दर्जे की अनुशंसा करने वाले एक प्रस्ताव पर ‘‘मोटे तौर पर’’ राजी है।

एनसीएसटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मुद्दे को समझने के लिए चार सितंबर को मंत्रालय और आयोग के प्रतिनिधियों के बीच आंतरिक चर्चा हुई।

अधिकारी ने कहा, ‘‘मोटे तौर पर हर कोई लद्दाख के लिए आदिवासी इलाके के दर्जे की अनुशंसा करने वाले प्रस्ताव पर राजी हो गया। बैठक के दौरान पांचवीं और छठी अनुसूची के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा हुई। इस मामले पर अंतिम निर्णय 11 सितंबर को लिया जाएगा।’’