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मुजफ्फरपुर में मरीजों से हुई हाथापाई, सुरक्षाकर्मियों ने रिपब्लिक भारत के संवाददाता से भी की बदसलूकी

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानि चमकी बुखार से अबतक 150 बच्चों की मौत हो गयी है। यहां हर तरफ मातम पसरा हुआ है। मासूमों के माता-पिता का रो रोकर बुरा हाल है। अपने बच्चे की अचानक मौत से सन्न लोग खून की आंसू रोने को मजबूर हैं लेकिन डॉक्टर साहब जनता को ही मूर्ख बता रहे हैं । वहीं हमारे संवाददाता विकास शर्मा से मुजफ्फरपुर में रिपोर्टिंग दौरान बदसलूकी हुई। दरअसल नेताओं की आवभगत में लगे सुरक्षाकर्मियों ने जब मरीजों के साथ बदसलूकी की तो इस पर रिपब्लिक भारत ने सवाल पूछे। जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने रिपब्लिक भारत की टीम के साथ बदसलूकी करने लगे। 

बता दें यहां अस्पताल में परेशान लोग रोते बिलखते परिजन को अंदर जाने से रोका गया। सुशासन बाबू के राज में मासूम दम तोड़ रहे हैं। उनकी पुलिस सच छिपाने के लिए अंदर जाने से रोक रही है और अस्पताल के सिक्योरिटी में तैनात सुरक्षाकर्मी मारपीट पर उतारु हैं, वह कैमरा तोड़ने की धमकी दे रहे हैं इसके साथ ही मुक्का दिखा रहे हैं और वह गुंडागर्दी पर उतर आए हैं।

वीडिया में साफ देखा जा सकता है कि नीतीश के राज में उनकी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस और सीक्यूरिटी गार्ड किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। एक तरफ मासूम बच्चे दम तोड़ रहे हैं। उनके परिवारवाले बिलख रहे हैं। लेकिन इन सबसे अनजान नीतीश की पुलिस और सीक्यूरिटी गार्ड मारपीट करने पर अमादा हैं। 

वीडियो में दिख रहा है कि दुख से परेशान परिवारवाले अपने लाडलों का हालचाल जानने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन उन्हें उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। सीक्यूरिटी गार्ड उन्हें अंदर जाने से जबरन रोक रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ नीतीश की पुलिस मीडियावालों को भी रोक रही है। जब R.भारत के संवाददाता ने नीतीश के झूठ का पर्दाफ़ाश करने की कोशिश की तो पुलिसवालों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।

इस बीच भोजपुरी एक्टर गायक खेसारी लाल भी अस्पताल में मरीजों का हालचाल जानने पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है, व्यवस्था की कमी है इसके साथ भीड़ इतनी है कि तिल रखने की जगह नहीं है लेकिन नेताओं और अभिनेताओं का टूरिज्म खत्म ही नहीं हो रहा है।

सभी के जहन में एक सवाल है कि आखिर एक बुखार के सामने नीतीश सरकार बेबस क्यों है? उस सवाल का जवाब दरअसल काफी हद तक मिल गया है क्योंकि जो दावे हैं वो हवाई हैं और जो हकीकत है वो रिपब्लिक भारत के कैमरे में कैद है।


जब बड़े-बड़े वादों और हकीकत के बीच बड़ा फासला होता है। तब अक्सर ऐसी तस्वीरें उभरकर सामने आती हैं। और सवाल पूछने पर मजबूर कर देती हैं। कि आखिर इस मर्ज का इलाज क्या है ? ये तस्वीरें मुजफ्फरपुर के SKMC अस्पताल परिसर की हैं। जहां एक तो मरीजों और उनके रिश्तेदारों के लिए बिस्तर की व्यवस्था नहीं है। तो दूसरी तरफ अस्पताल मूलभूत सुविधाओं से भी जूझ रहा है। और तो और अस्पताल में गंदगी का अंबार इस कदर है कि अस्पताल और कूड़ेदान में फर्क करना बेहद ही मुश्किल है।