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पूर्व मंत्री मंजू वर्मा को फरार नहीं घोषित करने का अदालत से अनुरोध

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के वकील ने एक स्थानीय अदालत से अनुरोध किया है कि वर्मा को फरार घोषित नहीं किया जाए. मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से निकटता को लेकर समाज कल्याण मंत्री पद से पूर्व में इस्तीफा दे चुकीं मंजू वर्मा के वकील ने यह अनुरोध किया. 

मंझौल अनुमंडल व्यवहार न्यायालय के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रभात त्रिवेदी ने गत 31 अक्टूबर को मंजू वर्मा की गिरफ्तारी के लिए बुधवार को वारंट जारी किए जाने का आदेश दिया था. पुलिस ने पूर्व मंत्री को फरार घोषित कर भादंवि की धारा 82 के तहत विज्ञापन जारी करने के लिए अर्जी डाली थी.

इस पर मंजू वर्मा के वकील सत्यनारायण महतो ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मंगलवार को उनकी अग्रिम जमानत की याचिका के उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन होने का हवाला देते हुए विज्ञापन जारी करने के पुलिस के आवेदन को स्वीकार नहीं किए जाने का आग्रह किया.

पूर्व मंत्री के वकील ने कहा कि उनकी मुवक्किल के फरार नहीं होने और न्यायिक प्रक्रिया में लगातार बने रहने (अग्रिम जमानत की याचिका के उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन होने) का हवाला दिया. मुजफ्फरपुर बालिका गृह में लड़कियों के यौन शोषण मामले की जांच कर रही सीबीआई द्वारा पूर्व मंत्री के बेगूसराय जिला स्थित आवास पर गत 17 अगस्त को छापेमारी के दौरान उनके घर से अवैध हथियार के साथ 50 कारतूस बरामद किए थे.

इस मामले में सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) उमेश कुमार के आवेदन पर चेरिया बरियारपुर थाना में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा एवं उनके पति चंद्रशेखर वर्मा के विरुद्ध भादंवि की धारा 25(1)ए, 26 एवं 35 के तहत कांड संख्या 143/18 दर्ज की गई थी.

इस मामले में फरार चल रहे चंद्रशेखर वर्मा के गत 29 अक्टूबर को मंझौल अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय के न्यायाधीश योगेश कुमार मिश्र की अदालत में आत्मसमर्पण कर देने पर न्यायाधीश ने उन्हें छह नवंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया था.

मुजफ्फपुर में आश्रय गृह में 30 से अधिक लड़कियों का कथित रुप से बलात्कार और यौन शोषण किया गया है.  टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज द्वारा राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट में यह मुद्दा पहली बार सामने आया था.

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