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किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए फसल चक्र में बदलाव करना होगा: नीतीश कुमार

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए फसल चक्र में बदलाव करना होगा।

उन्होंने बताया कि जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम की योजना का कार्यान्वयन चार संस्थाओं- बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया, डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा, समस्तीपुर), बिहार कृषि विश्वविद्यालय (भागलपुर) तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, (पूर्वी क्षेत्र, पटना) को करना है।

जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए नीतीश ने कहा कि प्रथम चरण में बिहार के आठ जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों में इसे प्रारम्भ किया जा रहा है।

साथ ही साथ इन आठ जगहों पर पांच-पांच गांवों का चयन कर वहां जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि कार्यक्रम लागू कराये जायेंगे। इन आठ जिलों के बाद जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम को पूरे बिहार में लागू किया जायेगा।

नीतीश ने कहा, “बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया का केंद्र पूसा में बने, इसके लिए हम शुरू से प्रयासरत रहे क्योंकि समस्तीपुर का इलाका कृषि के लिए खास रहा है। देश में तीन जगहों पर इसका केंद्र बना, जिनमें से एक पूसा में है।

नीतीश ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए फसल चक्र में बदलाव करना होगा।

उन्होंने कहा, “जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के लिए राशि भी मंजूर कर दी गयी है। मुझे पूरा भरोसा है कि इस कार्यक्रम का परिणाम अच्छा होगा और इसके लिए जितनी धन राशि की आवश्यकता होगी, उसे राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी।”

नीतीश ने कहा, “जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम का कार्यान्वयन जिन चारों समूहों द्वारा किया जाना है, मैं उन चारों समूहों के लोगों से कहूंगा कि जगह-जगह जाकर आप किसानों को समझायें कि वे अपने खेतों में फसल अवशेष को न जलायें। फसल अवशेष उपयोगी हैं, इसे आप सभी मिलकर लोगों को समझाइये।”

उन्होंने कहा कि बिहार में पहले ज्यादातर धान और गेहूं की ही बुआई हुआ करती थी लेकिन पर्यावरण में बदलाव के कारण अब 10 प्रतिशत क्षेत्र में मक्के की बुआई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि पहले रोहतास और कैमूर के इलाके में ही खेतों में फसल अवशेष जलाए जाते थे लेकिन अब यह सिलसिला पटना, नालंदा होते हुए उत्तर बिहार में भी पहुंच गया है, जो बहुत ही खतरनाक है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि विभाग ने कार्यक्रम सुनिश्चित किया है ताकि लोगों को प्रेरित कर खेतों में फसल अवशेष जलाने की परम्परा पर रोक लगाई जा सके।
 

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