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भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर अजाद ने ‘‘आजाद समाज पार्टी’’ बनाई

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशी राम की जयंती पर रविवार को ‘‘ आजाद समाज पार्टी’’ नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई।

नोएडा के बसई गांव में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी गठित करने का ऐलान करने से पहले 37 वर्षीय आजाद ने अपने ट्विटर अकाउंट से कांशीराम की तस्वीर साझा की। उन्होंने पार्टी का झंडा भी जारी किया। झंडे में ऊपर और नीचे दो नीली पट्टी और बीच में सफेद पट्टी पर नीले रंग से आजाद समाज पार्टी लिखा गया है।

नयी पार्टी के नाम के ऐलान के दौरान भीम आर्मी के कार्यकर्ता भारी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 28 पूर्व विधायक और छह पूर्व सांसद भी पहुंचे थे।

आजाद ने इस मौके पर कहा कि भीम आर्मी, पार्टी के साथ दलितों की लड़ाई और नये सदस्य बनाने का काम साथ-साथ करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि कांशीराम जी का जन्मदिन हम लोगों के लिए एक प्रेरणा दायक दिवस है। बाबा साहेब को, तथा उनके जीवन के संघर्ष को हमारे सामने रखने वाले मान्यवर कांशीराम के बताए हुए मार्ग पर चलकर हमें संघर्ष करना है।

आजाद ने दावा किया कि एक दिन आजाद समाज पार्टी दिल्ली की गद्दी पर आसीन होगी।

वहीं, भीम आर्मी द्वारा सेक्टर 70 में किए गए कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन काफी तनाव में है। कोरोना वायरस की वजह से जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर ने सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों पर फिलहाल रोक लगा रखी है। इसके बावजूद भीम आर्मी के नेताओं ने सेक्टर 70 में कार्यक्रम किया। कार्यक्रम के दौरान भारी संख्या में पुलिस के जवान वहां पर मौजूद रहे।

इससे पहले दिन में भीम आर्मी के सदस्यों ने दावा किया कि पुलिस ने कार्यक्रम स्थल के प्रवेश द्वारा पर ताला लगाकर नोटिस चस्पा दिया जिसमें लिखा था कि कोरोना वायरस के मद्देनजर बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर रोक है। हालांकि, बाद में प्रवेश द्वार खोल दिए गए।

उल्लेखनीय है कि आजाद 2017 में सहारनपुर में दलितों और ठाकुरों के बीच हुए संघर्ष के दौरान चर्चा में आए और 2019 के आम चुनाव में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नामांकन दाखिल किया। हालांकि, बाद में उन्होंने नाम वापस ले लिया।

दिसंबर 2019 में भीम आर्मी प्रमुख को दिल्ली पुलिस ने तब गिरफ्तार किया था जब संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर लोगों को संबोधित करने के बाद उन्होंने मार्च निकाला और हिंसा हुई। जनवरी में दिल्ली की अदालत ने इस मामले में आजाद को जमानत दी।

वकील से नेता बने आजाद दलितों के लिए पर्याप्त काम नहीं करने का आरोप लगा बसपा प्रमुख मायावती की आलोचना करते रहे हैं। वहीं मायावती ने पहले आजाद को भाजपा का एजेंट बताया था और अपने समर्थकों को उनसे सतर्क रहने की सलाह दी थी।

भीम आर्मी प्रमुख ने पहले ऐलान किया था कि वर्ष 2022 में होने वाले उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिये वह वृहद गठबंधन ‘‘ भागीदारी संकल्प मोर्चा’’ के तहत ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ मिलकर लड़ेंगे।