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नागरिकता संशोधन विधेयक पर अर्नब की दो टूक राय

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

जम्मू - कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर अपनी मुहर लगा दी है।  बता दें सिटिजनशिप बिल को बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दे दी, जिसके जरिए पाकिस्तान , बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर - मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकात दी जा सकेगी । लोकसभा के पिछले कार्यकाल के दौरान निष्प्रभावी हो चुके इस बिल को अगले सप्ताह संसद में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। नागरिकता विधेयक का उद्धेश्य छह समुदायों हिंदू , ईसाई, सिख, जैन , बौद्ध तथा पारसी के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। बिल के जिरये मौजूदा कानूनों में संशोधन किया जाएगा। ताकि चुनिंदा वर्गों के गौरकानूनी प्रवासियों को छूट प्रदान की जा सके। चूंकी इस विधेयक में  मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है।  इसलिए विपक्ष ने बिल को भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतो के खिलाफ बतात हुए उसकी आलोचना की है। 


नागरिकता संशोधन विधेयक पर अर्नब की राय 

आज मोदी सरकार की कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन विधेयक पास किया। लेकिन विधेयक संसद में आए उसके पहले ही इस पर हिंदू-मुसलमान शुरू हो गया है। तर्क दिया जा रहा है कि केंद्र सरकार भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती है। विधेयक के विरोधी कह रहे हैं मोदी सरकार NRC के नाम मुसलमानों को देश से भगा रही है और अब नागरिकता संशोधन के बहाने हिंदुओं को बसा रही है। जो लोग हर बात पर हिंदू-मुसलमान करने हैं। उन्हें मैं साफ बता दूं कि NRC घुसपैठियों को देश से बाहर करने के लिए है। और CAB यानी Citizenship Amendment Bill गैर हिंदू शरणार्थियों की मदद के लिए है। अगर पाकिस्तान या बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है। तो क्या उन्हें सहारा देना गलत है। ये किसी धर्म के नहीं मुसीबत में फंसे लोगों को मदद करने का फैसला है। फिर इस पर राजनीति क्यों इसीलिए पूछता है भारत


अगर सरकार शरणार्थियों की मदद करना चाह रही है.. तो उसमें हिंदू-मुस्लिम का बंटवारा कहां से आ गया?

हमारे पड़ोसी देश में जिन लोगों को गैर मुस्लिम होने की सजा मिल रही है.. क्या उनके साथ खड़ा होना गुनाह है?

नागरिकता बिल का विरोध करने वाले लोग क्या पाकिस्तान की मानसिकता के साथ हैं?

ये सवाल आपको चुभेगा लेकिन मैं पूछूंगा क्या हिंदुस्तान में कुछ लोग घुसपैठियों को बचाने और हिंदुओं को भगाने की साजिश कर रहे हैं

हिंदू-मुसलमान से ऊपर उठकर इंसान के बारे में सोचना क्या संविधान के खिलाफ है?


उन्होंने कहा भारत किसी धर्म या संप्रदाय का विरोधी नहीं है। लेकिन सिर्फ धर्म के नाम पर एक और कश्मीर नहीं बन सकता है। अब ये संभव नहीं है कि हम आंख मूंद कर बैठे रहें, और वो घुसपैठिए आतंक फैलाएं। क्या भारतीय शरणार्थी नहीं है अमेरिका और कनाडा में भारतीय भी शरणार्थी हैं अगर कल को उन्हें उस देश की नागरिकता मिलती है तो क्या आप विरोध करेंगे।

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