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क्या कोरोना के नाम पर कुछ लोग राम मंदिर का शिलान्यास रुकवाने की साजिश कर रहे हैं? जाने इस मुद्दे पर अर्नब की राय

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:


अयोध्या में 5 अगस्त को श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया जाएगा। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को पहली बार जब अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण कार्य के लिए उद्घाटन समारोह में पहुंचेंगे। ऐसे में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लीमीन (एआईएमआईएम) के सांसद इम्तियाज जलील ने शुक्रवार को कहा कि वह अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन कोविड-19 महामारी को देखते हुए ‘भूमि पूजन’ को टाला जा सकता है।

औरंगाबाद के सांसद ने यहां कहा, ‘‘हमें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर जो समय चुना गया है उससे हमें समस्या है।’’ जलील ने दावा किया कि उत्तरप्रदेश में स्वास्थ्य ढांचा खराब है।

हालांकि भाजपा ने कहा है कि करीब 200 व्यक्ति ही कार्यक्रम में शिरकत करेंगे और महत्वपूर्ण हस्तियों के पहुंचने के कारण बड़ी संख्या में पुलिस भी तैनात होगी।

उन्होंने पूछा कि अगर इस कार्यक्रम के लिए दो घंटे की अनुमति दी जाती है तो सामान्य श्रद्धालुओं को मंदिरों में पूजा करने या मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती, जहां बहुत कम समय लगता है। उन्होंने पूछा, ‘‘क्या अयोध्या जाने वाले लोगों का महामारी से किसी तरह का समझौता हो गया है या इस दौरान वायरस छुट्टी पर चला जाएगा।’’


अर्नब की राय 

इस वक्त देश के हर कस्बे, हर गांव, हर गली और हर मोहल्ले से एक ही आवाज आ रही है 'सौगंध राम की खाते हैं, हम मंदिर वहीं बनाएंगे'। देशवासियों की ये सौगंध 5 अगस्त को पूरी होने जा रही है। लेकिन इस शुभ घड़ी के पहले वो लोग लौट आए हैं। जिनके चेहरे पर नफरत की नकाब है। जो राम मंदिर के फैसले पर कहते थे कि हमें खैरात नहीं चाहिए, जो कहते थे कि हमारी मस्जिद वापस चाहिए, उन लोगों की जिन्ना वाली सोच फिर से जिंदा हो गई है। इसीलिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के सांसद इम्तियाज जलील कह रहे हैं कि मोदी साहब अयोध्या जा रहे हैं तो क्या इससे कोरोना ख़त्म हो गया। नफरत फैालने वाले पूछ रहे हैं कि क्या शिलान्यास से कोरोना ठीक हो जाएगा? शायद राम द्रोहिय भूल रहें हैं कि कोरोना की वजह से इस बार अमरनाथ यात्रा नहीं हुई। कोरोना की वजह से इस बार कांवड़ यात्रा नहीं हुई। क्योंकि यात्रा अगले वर्ष फिर हो सकती है। लेकिन राम मंदिर शिलान्यास का मौका 492 साल बाद आया है। सनातन धर्म कई पीढ़ियों से इसका इंतजार कर रहा है, इसीलिए देश की भावनाओं का ध्यान रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के शिलान्यास में शामिल हो रहे हैं। देश जान चुका है कि आप लोगों की परेशानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अयोध्या जाना नही है। आप लोगों की परेशानी कोरोना नहीं है। आप लोगों की परेशानी राम मंदिर का निर्माण है। इसीलिए आप लोग फिर एक बार नफरत जहर फैला रहे हैं। लेकिन राम भक्तों की प्रतिज्ञा को इस बार कोई गैंग या कोई लॉबी नहीं रोक पाएगी। इस बार रामद्रोहियों की नफरत वाली राजनीति खत्म होगी।