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CAA विरोध की लड़ाई, हिंदुत्व पर क्यों आई? जाने इस मुद्दे पर अर्नब की राय

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:


नागरिकता कानून का विरोध अब हिंदुत्व का विरोध बन गया है। दिल्ली का शाहीन बाग हो या कोटा का ईदगाह, प्रयागराज का मनसूर अली पार्क हो या फिर AMU का  मेन गैट। जहां भी CAA का विरोध हो रहा है वहां हिंदुत्व के प्रतीकों का अपमान हो रहा है। हिंदू विरोधी नारे लग रहे हैं। जिन्ना की जयकार हो रही है। जिन प्रतीकों की हिंदू धर्म में पूजा होती है। जिन प्रतीकों को आप मंदिर की दीवारों पर बना देखते हैं। उनका इस्तेमाल सत्ता विरोध के लिए हो रहा है। आखिर सियासत के लिए हिंदुओं का अपमान कब तक? 

इसलिए पूछता है भारत

अगर प्रदर्शन करने वालों का विरोध सरकार से है, तो हिंदुओं का अपमान क्यों किया जा रहा है?

नागरिकता कानून हिंदुओं ने नहीं संसद ने बनाया है, फिर प्रदर्शन में हिंदू विरोधी नारे क्यों? 

क्या हिंदू प्रतीकों का अपमान कर, मुसलमानों को हिंदू विरोधी बताने की साजिश हो रही है

जो लड़ाई नागरिकता कानून के खिलाफ शुरू हुई थी, वो हिंदू-मुस्लिम पर कैसे आ गई क्या ये देश को जलाने की एक-सोची समझी प्लानिंग है?

अर्नब की राय 

अगर विरोध CAA का है तो शाहीन बाग में स्वास्तिक  का अपमान क्यों?  स्वास्तिक और CAA दोनों में कौन सा संबंध है? हिंदू धर्म में स्वास्तिक की चार रेखाएं भगवान ब्रह्मा का प्रतीक हैं इसीलिए किसी काम की शुरुआत स्वास्तिक बनाकर की जाती है और आप लोग नफरत फैलाने की शुरुआत स्वास्तिक से कर रहे हैं। अलीगढ़ में नारा लगता है- हिंदुत्व की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, योगी तेरी कब्र खुदेगी AMU की धरती पर , ऐसे नारों में CAA का विरोध कहां है। आज तक शाहीन बाग में वंदेमातरम के नारे क्यों नहीं लगे। CAA के खिलाफ खड़े लोगों ने आज तक हिंदुस्तान जिंदाबाद क्यों नहीं कहा। जिन्ना वाली आजादी तो कहते हैं वंदे मातरम भी कहिए। अगर CAA का विरोध तो पोस्टर पर अपशब्द के साथ हिंदुत्व क्यों लिखा है। CAA का विरोध है तो पोस्टर में ऊं का अपमान क्यों है?

 

टुकड़े गैंग क्या कहती है, वो कहते हैं भारत माता की जय एक साम्प्रदायिक नारा है। माता सिर्फ माता होती है हिंदू मुसलमान नहीं , आप लोग मां को हिंदू-मुसलमान में बांट रहे हो। उन्होंने कहा ये नफरत कौन फैला रहा है? युवाओं को ये पोस्टर कौन दे रहा है जिस पर लिखा है लाल किला तो मुगलों ने बनवाया था। इसलिए 26 जनवरी को मोदी जी वहां से भाषण न दें। लाल किला हिंदुस्तान का है। हिंदू मुसलमान का नहीं। प्रयागराज में नारे लगे इंकलाब जिंदाबाद, सबने इसे संवारा है, जितना तुम्हारा, उतना ही यह मुल्क हमारा है। किसने कहा कि ये मुल्क आपका नहीं है। CAA तो नागरिकता देने के लिए है। लेने के लिए नहीं।


बता दें दिल्ली के शाहीन बाग का एक और पोस्टर सामने आया है। इस तस्वीर में तीन महिलाओं को बुर्क़ा पहने और माथे पर बिंदी लगाए दिखाया गया है। इसके अलावा, पोस्टर के नीचे, फ़ैज़ की कविता ‘हम देखेंगे’ शीर्षक से कुछ पंक्तियाँ भी लिखी हुई हैं। अंत में, हिन्दू स्वस्तिक को खंडित कर उसका विघटित रूप दर्शाया गया। यह पोस्टर स्पष्ट रूप से हिन्दुओं पर इस्लामी वर्चस्व की स्थापना और हिन्दुओं के घृणा जताने की मंशा से ओत-प्रोत है।  

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