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जेएनयू फीस विवाद को लेकर छात्रों के आंदोलन पर अर्नब गोस्वामी की दो टूक

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

वैसे तो जेएनयू में पढ़ना हर एक छात्र का सपना होता है, हर छात्र की ये ख्वाहिश होती है कि एक बार जेएनयू में पढ़ने का मौका जरूर मिले। लेकिन जेएनयू में अब जो हो रहा है, उसने भविष्य में जेएनयू में पढ़ाई करने वाले छात्रों के ख्वाब को धुंधला कर दिया है। फीस बढ़ोतरी के नाम पर सड़कों पर संग्राम कर रहे छात्रों ने सारी मर्यादाएं तोड़ दी। 

फीस बढ़ोतरी के विरोध में संसद मार्च कर रहे छात्रों को जब पुलिस ने रोकना चाहा, तो जेएनयू के ये छात्र पुलिस से ही भिड़ गए। छात्रों की गुंडागर्दी से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, इनकी ही गुंडागर्दी की वजह से कई मेट्रो स्टेशन को बंद करना पड़ा। जिससे दिल्ली के लोग दिन भर परेशान दिखाई दिए, फीस बढ़ोतरी के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले ये छात्र देश को कैसा बनाने चाहते हैं। 
 
दरअसल छात्रावास शुल्क में बढ़ोतरी के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर में पिछले तीन सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे छात्र संसद का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सोमवार को सड़कों पर उतर आए। उन्होंने अपने हाथों में तख्तियां और बैनर ले रखे थे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक सरकार बढ़ाए गए शुल्क को वापस नहीं लेती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हो रही थी।

अर्नब की राय

आज Jawaharlal Nehru University के कुछ छात्रों ने  दिल्ली को बंधक बना दिया। कल तक जो छात्र System को चुनौती दे रहे थे।  आज वो संसद और सरकार को चुनौती दे रहे हैं।  फीस कम हो,  इससे किसी को इनकार नहीं।  लेकिन क्या आंदोलन के नाम पर देश के अपमान की आजादी है।  क्या JNU में पढ़ने वाले छात्र किसी दूसरे planet से आते हैं। उन्हें किस बात से आजादी चाहिए? अगर कैंपस में गंगा ढाबे की दाल खराब हो जाए,  तो आजादी।  कैंपस के अंदर मीडिया आज जाए,  तो आजादी।  लेकिन मैं पूछता हूं कि संविधान का अपमान करने की आजादी,  JNU के कुछ छात्रों को किसने दी?  स्वामी विवेकानंद के अपमान की आजादी किसने दी?  देश के प्रधानमंत्री को गाली देने की आजादी किसने दी। कैंपस में महिलाओं के अपमान की आजादी किसने दी। 

बता दें, दिन में, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने तीन सदस्यीय एक समिति गठित की जो विश्वविद्यालय में सामान्य कार्यप्रणाली बहाल करने के तरीकों की सिफारिश करेगी।

समिति छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल वार्ता करेगी और उठाए जाने वाले कदमों पर सुझाव देगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) समिति के कामकाज के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।

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