General News

ट्रंप मध्यस्थता विवाद: विदेश मंत्री जयशंकर के बयान के दौरान विपक्ष की नारेबाजी से खफा हुए अमित शाह, कहीं ये बात

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान की प्रतिगूंज मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में सुनाई दी तथा विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से सफाई देने की मांग की जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘‘मध्यस्थता’’ की बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत सीमा पार से जारी आतंकवाद बंद होने के बाद हो पायेगी और यह लाहौर घोषणापत्र और शिमला समझौते के अंतर्गत ही होगी। 

इस दौरान लोकसभा में प्रश्नकाल शुरु होने के साथ ही कांग्रेस, द्रमुक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, सपा तथा कुछ अन्य दलों के सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए और इस मुद्दे को लेकर नारेबाजी करने लगे। उन्होंने ‘कश्मीर में विदेशी दखलअंदाजी नहीं चलेगी’ और ‘प्रधानमंत्री जवाब दो’ के नारे लगाए।

हालाँकि, जिस दौरान एस जयशंकर पूरे मामले पर बयान दे रहे  थे, तो विपक्ष जोरदार हंगामा करते हुए विदेश मंत्री के बयान को खारिज कर दिया। विपक्ष के तीखे तेवर देख मजबूरन गृहमंत्री अमित शाह को अपनी कुर्सी उठाना पड़ा और नाराजगी जताते हुए कहा कि 'विपक्ष की भाषा अनुचित' है। जिसके बाद स्पीकर ओम बिरला से अनुरोध करते हैं कि विदेश मंत्री को उनका बयान को एक बार और पढ़ने के लिए अनुमति दें क्योंकि शोर शराबे के कारण सदन बयान नहीं सुन सका। 

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो हफ्ते पहले उनके साथ थे और उन्होंने कश्मीर मामले पर मध्यस्थता की पेशकश की थी और उन्हें (ट्रंप को) इसमें मध्यस्थता करने पर खुशी होगी।

लोकसभा एवं राज्यसभा में विपक्ष द्वारा यह मुद्दा उठाये जाने पर विदेश मंत्री जयशंकर ने दोनों सदनों में बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हम सदन को पूरी तरह आश्वस्त करना चाहेंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया गया है। 

विदेश मंत्री ने कहा ‘‘पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत सीमा पार से जारी आतंकवाद बंद होने के बाद, लाहौर घोषणापत्र और शिमला समझौते के अंतर्गत ही होगी।’’ 

उन्होंने कहा ‘‘ हम अपना रूख फिर से दोहराते हैं कि पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय तरीके से ही किया जाएगा ।’’ 

उनके बयान से विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और प्रधानमंत्री से सदन में आ कर स्पष्टीकरण देने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे।

DO NOT MISS