General News

नसीरुद्दीन शाह के समर्थन में उतरे अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, कहा- ''हमें आवाज उठानी चाहिए''

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने रविवार को अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें ‘परेशान’ करने की कोशिश की जा रही है.

देश में भीड़ हिंसा पर प्रतिक्रिया देने और गैर सरकारी संगठनों पर सरकार द्वारा की जा रही कथित कार्रवाई के खिलाफ एमनेस्टी इंडिया के लिए एक वीडियो में आने की वजह से बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह विवादों में आ गए हैं.

जिसपर अमर्त्य सेन ने कहा कि अभिनेता को ‘परेशान’ करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

वीडियो में शाह ने शुक्रवार को कहा कि जो अधिकारों की मांग कर रहे हैं, उन्हें कैद किया जा रहा है.

सेन ने कहा, ''हमें अभिनेता को परेशान करने के इस तरह के प्रयासों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. देश में जो कुछ हो रहा है, वो आपत्तिजनक है और इसे जरूर रोका जाना चाहिए.''

गौरतलब है कि नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि पूरे मुल्क में नफरत और ज़ुल्म का बेखौफ नाच ज़ारी है.

बता दें, वीडियो के माध्यम से अधिकार समूह ने भारत सरकार को एक संदेश दिया कि उन्हें 'अपनी कार्रवाई को समाप्त करना चाहिए'. इस ट्वीट में नसीरुद्दीन शाह ने 'स्वतंत्र भारत' की बात की है.

नसीरुद्दीन ने इस वीडियो में कहा है, 'अब हक़ के लिए आवाज़ उठाने वाले जेलों में बंद हैं. कलाकार, फंकार, अदीब, शायर सबके काम पर रोक लगाई जा रही है. जर्नलिस्ट को भी खामोश किया जा रहा है. मज़हब के नाम पर नफरतों की दीवारें खड़ी की जा रही हैं.'

इसे भी पढ़ें - एमनेस्टी इंडिया के VIDEO में बोले नसीरुद्दीन शाह, 'पूरे मुल्क में नफरत और ज़ुल्म का बेखौफ नाच ज़ारी है'

इसके साथ ही देश की वर्तमान स्थिति को कटघरे मे खड़ा करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि मासूमों का क़त्ल हो रहा है. पूरे मुल्क में नफरत और ज़ुल्म का बेखौफ नाच ज़ारी है. और इन सब के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों के दफ्तरों पर रेड डाल कर के, उनके लाइसेंस कैंसिल करके, उनके बैंक अकाउंट्स फ्रीज करके उन्हें खामोश किया जा रहा है. 

नसीरुद्दीन शाह के इस वीडियों को 'अबकी बार मानव अधिकार' हैशटैग के साथ शेयर किया गया है. इस वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है, '2018 में भारत में अभिव्यक्ति की आजादी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ काफी कार्रवाई हुई. चलें, इस साल अपने संवैधानिक मूल्यों के लिए खड़े हों और केंद्र सरकार को कहे दें कि अब ये कार्रवाई बंद होनी चाहिए.'

DO NOT MISS