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सीबीआई के 'टॉप' अधिकारी आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना में क्यों ठनी? जानें पूरा मामला....

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा (Alok Verma) और CBI के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana)के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है. एक अप्रत्याशित कदम के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ इस आरोप को लेकर मामला दर्ज किया है कि मांस कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े एक मामले में जिस एक आरोपी के विरुद्ध वह जांच कर रहे थे, उससे उन्होंने रिश्वत ली. दो महीने पहले अस्थाना ने कैबिनेट सचिव से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ यही शिकायत की थी. 

अस्थाना ने आलोक वर्मा पर लगाए गंभीर आरोप..
 
वहीं अस्थाना ने पलटवार करते हुए सीबीआई चीफ आलोक वर्मा पर ही रिश्वत लेने का आरोप लगाया है. अस्थाना ने कैबिनेट सचिव और केन्द्रीय सतर्कता आयोग को पत्र लिख कर सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और अनियमितता के कम से कम 10 मामलों का जिक्र किया था.


सीबीआई ने किया अपने चीफ का बचाव...

सीबीआई ने अपने निदेशक आलोक वर्मा का विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के आरोपों से बचाव करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप ‘मिथ्या और दुर्भावनापूर्ण’ हैं. सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि सतीश साना के खिलाफ एलओसी जारी होने की जानकारी सीबीआई के निदेशक को नहीं थी, जैसे आरोप सही नहीं हैं.


कौन है राकेश आस्थाना? 

राकेश आस्थाना  गुजरात बैच 1984 के आईपीएस अधिकारी हैं. पहली बार वो उस वक्त चर्चा में आए, जब उन्होंने चारा घोटाला मामले में आरजेडी प्रमुख लालू यादव को गिरफ्तार कर लिया था. वहीं साल साल 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस कांड में जांच के लिए गठित एसआईटी की उन्होंने ही अध्यक्षता की थी. अहमदाबाद ब्लास्ट और आसाराम केस जैसे हाई प्रोफाइल केस में भी उनका विशेष योगदान रहा था. यह भी बताते चले कि पिछले साल के अंत में ही उन्हें सीबीआई का स्पेशल डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था. यहीं नहीं वो उस विशेष जांच दल (एसआईटी) की अगुवाई कर रहे हैं जो अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले और उद्योगपति विजय माल्या द्वारा की गयी ऋण धोखाधड़ी जैसे अहम मामलों को देख रहा है. यह दल मोईन कुरैशी मामले की भी जांच कर रहा है.


कांग्रेस ने क्या दी प्रतिक्रिया?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है.  राहुल गांधी ने आज ट्वीट कर कहा, ''गोधरा एसआईटी फेम, सीबीआई में नंबर दो पद पर घुसपैठ करने वाले गुजरात कैडर के अधिकारी और पीएम के चहेते अब घूसखोरी के मामले में फंस गए हैं. इस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सीबीआई राजनीतिक बदले की कार्रवाई का हथियार बन गई है. अंदरुनी लड़ाई की वजह से संस्था गिरावट की ओर है.''

कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं लेकिन बेहद स्पष्ट हैं क्योंकि उन्होंने खबरों में ही इस मामले को देखा है इसलिए वह इस वक्त इस मामले की सच्चाई पर कुछ नहीं कह सकते.

इस मामले पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा,‘‘लेकिन मुझे उम्मीद है कि एक या दो दिन में हमें स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. मुझे एक बात कहनी है कि अगर टुकड़ों में ही सही जो बात मैंने और आपने सुनी है वह सही है तो यह बेहद गंभीर से भी गंभीर है और याद रहे यह वही नियुक्ति है जो नियुक्ति के वक्त भी आपत्तियों के घेरे में थी, शुरूआत से ही.’’

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