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एम्स आग : अस्पताल में सभी सेवाएं बहाल, वार्ड में वापस भेजे गए मरीज

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) परिसर में आग लगने की घटना के एक दिन बाद रविवार को अस्पताल ने पूरी तरह काम करना शुरू कर दिया। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि एहतियात के तौर पर जिन मरीजों को बाहर निकाला गया था उन्हें फिर से उनके संबंधित वार्ड में वापस भेज दिया गया।

अस्पताल की ओर से जारी बयान के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने रविवार सुबह एम्स में हालात का जायजा लिया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी अस्पताल के प्रभावित हिस्से में जाकर हालात का जायजा लिया और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरु

ण जेटली के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली। जेटली इस प्रतिष्ठित अस्पताल में कार्डियो-न्यूरो सेंटर के आईसीयू में भर्ती हैं। जेटली जहां भर्ती हैं वह जगह एम्स परिसर के अलग भवन में स्थित है।

जेटली को नौ अगस्त को भर्ती किया गया था और उन्हें जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा गया है। कई प्रमुख नेता बीते कई दिनों से अस्पताल आकर उनके स्वास्थ्य का हाल जान रहे हैं।

शनिवार शाम करीब पांच बजे अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में आग लग गयी और इमारत से निकलते धुएं का गुबार देख दहशत का माहौल पैदा हो गया, जिसके कारण आपात सेवाएं प्रभावित हुईं। अधिकारियों के अनुसार एहतियात के तौर पर 32 मरीजों को वहां से निकाला गया।

सूत्र ने बताया कि आग में सर्जरी, यूरोलॉजी, त्वचा विज्ञान विभाग, माइक्रोबायोलॉजी और हड्डी रोग विभाग के दफ्तर जलकर खाक हो गये और शोध के कई आंकड़े, नमूने एवं पांडुलिपियां नष्ट हो गयीं।

बयान के अनुसार एम्स प्रशासन ने आग लगने के कारणों का पता लगाने और बचाव उपायों को और मजबूत करने के लिये के लिये आंतरिक जांच शुरू की है।

बयान के अनुसार, ‘‘आग से अस्पताल क्षेत्र प्रभावित नहीं हुआ है और कोई हताहत नहीं हुआ है। एहतियात के तौर पर एम्स प्रशासन ने अस्पताल के एबी विंग के मरीजों को इसके अन्य हिस्सों में भेज दिया था। अब इन मरीजों को वापस एबी विंग के उनके संबंधित वार्ड भेज दिया गया है।’’ 

इसके अनुसार अस्पताल के आपात विभाग समेत आपात प्रयोगशालाएं पूरी तरह से काम कर रही हैं। दिल्ली दमकल सेवा के अधिकारियों के अनुसार इस भवन का निर्माण 1983 से पहले उस वक्त हुआ था जब निर्माण के नियम लागू हो गये थे। उन्होंने बताया कि भवन में आग से बचाव के उपकरण मौजूद थे।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस बीच एम्स के एमबीबीएस-2019 के दाखिले के लिये काउंसलिंग के शुरूआती राउंड का समय बदलकर इसे 20 से 21 अगस्त के बजाय 26 और 27 अगस्त कर दिया गया है।

एम्स की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, ‘‘एमबीबीएस, 2019 के लिये काउंसलिंग के ओपन राउंड में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों और उनके अभिभावकों की बड़ी संख्या और मौजूदा स्थिति को देखते हुए उचित इंतजाम और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये संबंधित प्राधिकारी ने इसके समय को पुनर्निर्धारित करने का फैसला किया है। यानी अब यह 20 और 21 अगस्त के बजाय 26 और 27 अगस्त को किया जायेगा।’’ 

बयान के अनुसार एम्स के निदेशक सभी विभाग प्रमुखों और प्रशासनिक कर्मियों के साथ बैठक कर रहे हैं और जल्द से जल्द प्रयोगशाला सेवा बहाल करने के लिये स्थिति का जायजा ले रहे हैं ताकि मरीजों की देखभाल पर असर नहीं पड़े।

बयान के अनुसार, ‘‘एम्स में आग से बचाव के लिये नियमित रोकथाम प्रणाली है। दमकल कर्मी नियमित रूप से 24 घंटे वहां तैनात रहते हैं और आग के दौरान बाहर निकलने तथा गलियारों में बचाव प्रणालियों की जांच करते रहते हैं। समय-समय पर कर्मचारियों को आग से बचाव की जानकारी भी दी जाती है।’’ 

सूत्र ने बताया कि शनिवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद सभी डॉक्टरों ने शाम छह बजे से लगातार काम किया और यह सुनिश्चित किया कि मरीजों को परेशानी नहीं हो। यहां तक कि रविवार को भी हर डॉक्टर वहां मौजूद थे।

पुलिस ने बताया कि वे दमकल विभाग और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं जिससे आग के कारण का पता चल पायेगा।

गौरतलब है कि एम्स के टीचिंग ब्लॉक में शनिवार शाम भीषण आग लग गई थी जिससे जांच नमूने और मेडिकल रिपोर्ट बर्बाद हो गए थे।

इस संबंध में आईपीसी की धारा 285 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ आग या दहनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है।


 

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