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39 साल पहले बेहमई कांड में केस डायरी नहीं मिलने से टला फैसला, अब 24 जनवरी को आएगा फैसला

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

डकैती छोड़कर नेता बनीं दिवंगत पूर्व सांसद फूलन देवी की कथित संलिप्तता वाले चार दशक पुराने बेहमई काण्ड मामले में कानपुर की एक विशेष अदालत ने फैसला टाल दिया है। अब अदालत 24 जनवरी को अपना फैसला सुना सकती है। 

जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव पोरवाल ने शुक्रवार को 'भाषा' को बताया, ''हमें काफी उम्मीद है कि बेहमई काण्ड मामले में अदालत शनिवार को अपना फैसला सुनायेगी।''

जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव पोरवाल ने कहा कि बचाव पक्ष के वकील गिरीश नारायण दुबे ने उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय की कुछ सुनिश्चित व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए विशेष अदालत से कहा है कि वह बेहमई काण्ड मामले में निर्णय देते वक्त इनका भी ध्यान रखे।

पोरवाल ने बताया कि अदालत अब इस मामले में जिंदा बचे चार अभियुक्तों भीखा, विश्वनाथ, श्यामबाबू और पोशा के बारे में फैसला सुनायेगी। उन्होंने बताया कि उनमें से पोशा को छोड़कर बाकी तीनों आरोपी जमानत पर हैं जबकि तीन अन्य अभियुक्त अभी फरार हैं।

मालूम हो कि फूलन देवी और उनके साथियों पर कानपुर देहात जिले के बेहमई गांव में 14 फरवरी 1981 को 20 लोगों की सामूहिक हत्या करने का आरोप है। माना जाता है कि फूलन ने लाला राम तथा श्रीराम नामक दो लोगों से अपने बलात्कार का बदला लेने के लिये उस वारदात को अंजाम दिया था।

फूलन ने वर्ष 1983 में मध्य प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। बेहमई काण्ड में फूलन समेत 35 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उनमें से आठ आरोपी पुलिस के साथ अलग—अलग मुठभेड़ों में मारे गये थे। मुख्य अभियुक्त फूलन की 25 जुलाई 2001 को नयी दिल्ली में गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। इस वक्त मामले के कुल सात अभियुक्त जिंदा हैं। उनमें से तीन फरार हैं।

फूलन 11 साल तक मध्य प्रदेश की ग्वालियर और जबलपुर जेल में रहीं और वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा फूलन के खिलाफ मुकदमा वापस ले लिये जाने पर उन्हें रिहा कर दिया गया। हालांकि कानपुर की अदालत ने यादव के निर्णय को खारिज कर दिया था और उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बहाल रखा था। बहरहाल, फूलन कानूनी लड़ाई लड़ती रहीं।

वर्ष 1996 में फूलन समाजवादी पार्टी के टिकट पर मिर्जापुर से सांसद चुनी गयी थी। उसके बाद वह 1999 में भी सांसद बनी।

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