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क्या इन ''तीन विवादों'' ने कांग्रेस को गुजरात चुनाव हरा दिया .. 

Written By Gaurav Kumar | Mumbai | Published:

बीते दो महीनों से कांग्रेस पार्टी गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों में लगातार प्रचार करती रही. इस दौरान कांग्रेस के भीतर खुद कई बड़े बदलाव को देखा गया. राहुल गांधी ने भारत की सबसे पुरानी पार्टी कही जाने वाली कांग्रेस के अध्यक्ष पद की शपथ ली. कांग्रेस खासतौर पर गुजरात चुनाव के प्रचार के दौरान लोगों के बीच गुजरात से जुड़े मुद्दों को उठाती रही.

इस बीच राहुल जीएसटी और नोटबंदी को भी कोसते दिखाई दिए. पिछले 22 सालों से बीजेपी के सत्ता में होने के कारण कांग्रेस गुजरात में अपना कोई भी बड़ा चेहरा, गुजरात की राजनीति में स्थापित नहीं कर पाई, या यूं कहे नरेंद्र मोदी के सामने कोई नेता उभर नहीं पाया. 

राहुल, जरूर इस चुनाव में नए तेवर और जोश के साथ मैदान में उतरे थे. खासकर सोशल मीडिया के माध्यम से राहुल ने बीजेपी के सबसे ताकतवर नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे हमले किए. इस बार कांग्रेस, गुजरात में पिछले दो-तीन साल से उभरे लोकल नेताओं को भी अपने साथ लाने में कामयाब रही. लेकिन, सवाल उठते हैं कि क्या कांग्रेस ने इनका इस्तेमाल खासतौर पर पाटीदार नेता हार्दिक पटेल का इस्तेमाल ठीक से किया? 

जब राहुल गुजरात की गलियों में घुम रहे थे, मंदिर-मंदिर जा रहे थे, तभी उनके साथ एक विवाद जुड़ गया. ये विवाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के धर्म को लेकर था. बता दें जब राहुल ने गुजरात के प्रसिद्ध मंदिर सोमनाथ दर्शन के लिए गए थे. तब राहुल गांधी द्वारा सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद, उनका नाम मंदिर के रजिस्टर में गैर हिन्दू के तौर पर एंट्री कराई गई थी.

 

आपको बता दें कि मंदिर के रजिस्टर में गैर हिन्दुओं की एंट्री होती है. मंदिर के नियमों के मुताबिक गैर हिन्दुओं का रजिस्टर में एंट्री करना जरूरी होता है. इस पूरे मामले को बीजेपी ने बड़ा मुद्दा बनाया और गुजरात की रैलियों में लोगों के बीच भी उठाया. 

इसके बाद कांग्रेस पार्टी को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब, अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी. सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील और कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने अयोध्या मामले की सुनवाई को साल 2019 तक के लिए टालने की मांग कर दी.

 

 

कोर्ट में कपिल सिब्बल ने कहा था, ''राम मंदिर एक गंभीर मुकदमा है. सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे पर साल 2019 के बाद सुनवाई करनी चाहिए. ''हम सभी जानते हैं कि यहां क्या हो रहा है, इस देश की राजनीति में और इसके बाहर इसका बहुत बड़ा असर होगा" जिसके बाद इस पूरे मामले पर बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा और राहुल गांधी से इस पूरे मामले पर उनका स्टैंड मांगा. 

वहीं गुजरात चुनाव को जब कुछ ही दिन रह गए थे तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री मोदी पर निजी हमला करते हुए उन्हें ''नीच आदमी'' कह दिया था. जिसके बाद राजनीति काफी गरमा गई थी.

खुद राहुल गांधी ने अय्यर से इस मामले पर मांफी मांगने के लिए कहा था. गुजरात चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने अय्यर को पार्टी से भी निकाल दिया था. यही वो समय था जब कांग्रेस इन चुनावों में बीजेपी से पिछड़ गई.  

गुजरात चुनाव में मिली हार को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्वीकार तो लिया है, लेकिन गुजरात चुनाव के परिणाम की बात करें तो इस बार गुजरात में कांग्रेस कहीं ज्यादा मजबूत होकर उभरी जरूर है. हिमाचल और गुजरात में चुनावी हार का जिम्मेदार EVM को ना बताकर कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है. 

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