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बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर मध्य प्रदेश विधानसभा में हंगामा, विपक्ष ने मांगा गृह मंत्री का इस्तीफ़ा

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

मध्य प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर स्थगन प्रस्ताव पर सदन में तुरंत चर्चा की मांग को ठुकराए जाने से नाराज होकर मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल नहीं चलने दिया, जिसके कारण सत्ता एवं विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। इसके चलते विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने पहले सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए और दूसरी बार प्रश्नकाल तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। इससे आज सदन में प्रश्नकाल नहीं हो पाया।

इसके बाद जब सदन की कार्यवाही तीसरी बार शुरू हुई तो अध्यक्ष ने भाजपा सदस्य एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर बोलने को मौका दिया। लेकिन जैसे ही चौहान अपनी बात सदन में रखने लगे, सत्ता पक्ष ने जोर-जोर से हंगामा मचाना शुरू कर दिया। इससे नाराज होकर चौहान ने सत्ता पक्ष पर विपक्षी सदस्यों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और अपनी पार्टी के सभी सदस्यों के साथ सदन से बहिर्गमन किया।

आज सुबह जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भोपाल में तीन दिन पहले तीन साल के बच्चे का अपहरण कर की गई हत्या पर विपक्ष का गुस्सा सदन में देखने मिला। भाजपा सदस्य शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर स्थगन प्रस्ताव पर सदन में तुरंत चर्चा करने की मांग रखते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।

इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजधानी भोपाल का तात्कालिक मामले का विषय है। प्रदेश में बच्चों की हत्या एवं बलात्कार हो रहे हैं।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री गोविन्द सिंह ने कहा कि कृपया प्रश्नकाल चलने दें। अपराधी पकड़े गए हैं। लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे और हंगामा मचाते रहे।

इसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि सामान्यत: बजट के दौरान स्थगन प्रस्ताव नहीं लिए जाते हैं। प्रश्नकाल चलने दें।

इस पर भाजपा सदस्य नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि बजट सत्र में पहले भी 25 बार स्थगन प्रस्ताव लिए गए हैं।

इसके बाद गोविंद सिंह ने कहा कि गृह विभाग की मांग के दौरान आप चर्चा कर सकते हैं।

सरकार के जवाब से नाराज होकर भाजपा सदस्य आसन के पास चले गए और हंगामा करने लगे। इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी।

इसके बाद जब दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो चौहान ने कहा कि पूरा प्रदेश त्राहि-त्राहि कर रहा है। आपसे निवेदन है कि स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराएं।

इस पर अध्यक्ष ने चौहान को कहा, ‘‘इस विषय में आप मेरे कक्ष में आइए। मेरे कक्ष में आकर बात कर लीजिए। मैं विचार करूंगा। कृपया प्रश्नकाल चलने दें। मैंने व्यवस्था भी दे दी है।’’ लेकिन भाजपा एवं कांग्रेस के सदस्यों ने अध्यक्ष की बात अनसुनी कर नोक-झोंक करते रहे। इसी हंगामे के बीच, अध्यक्ष ने दूसरी बार सदन में कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी, जिससे आज सदन में प्रश्नकाल नहीं हो पाया।

इसके बाद जब सदन की कार्यवाही तीसरी बार शुरू हुई तो अध्यक्ष ने भाजपा सदस्य चौहान को बोलने को मौका दिया। लेकिन जैसे ही चौहान प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर अपनी बात सदन में रखने लगे, सत्ता पक्ष ने जोर-जोर से हंगामा मचाना शुरू कर दिया। इससे नाराज होकर भाजपा सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।

बाद में विधानसभा परिसर में चौहान ने संवाददाताओं को बताया कि तीन दिन पहले भोपाल में तीन वर्षीय एक बालक का अपहरण कर हत्या कर दी गई, बच्चियों एवं महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहे हैं एवं लूट सहित ऐसी सैकड़ों घटनाएं मध्य प्रदेश में रोज घट रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह मानता हूं कि इसके लिए सिर्फ यह सरकार दोषी है, मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री दोषी हैं। इन्होंने तबादले का उद्योग खोला है। पुलिस के मनोबल को तोड़ दिया। रोज तबादले हो रहे हैं। पैसे लेकर काम किए जा रहे हैं। राजनीतिक वजूद का इस्तेमाल करके अधिकारियों के तबादले किए जा रहे हैं। पुलिस को कोई संसाधन भी नहीं दिए जा रहे। इसलिए पूरी सरकार इस मामले में कठघरे में खड़ी है।’’ चौहान ने कहा, ‘‘हालत इतनी खराब है कि मुख्यमंत्री (कमलनाथ) ने कानून-व्यवस्था की बैठक बुलाई। गृह मंत्री उसमें गैरहाजिर थे। पूरे प्रदेश में त्राहि-त्राहि मची है, जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। आज भी देखो हमने मुद्दा उठाना चाहा। सत्ता पक्ष ने मामले को उठाने नहीं दिया। अध्यक्ष महोदय ने उस पर चर्चा नहीं करने दी।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘हमने सरकार के रवैये के खिलाफ सदन से बहिर्गमन किया है और गृह मंत्री (बाला बच्चन) के इस्तीफे की मांग करते हैं।’’ चौहान ने बताया, ‘‘यह सरकार मध्य प्रदेश को तबाह एवं बर्बाद करने में लगी हुई है। हम चुप नहीं बैठेंगे। जनता के मुद्दों को सदन में उठाएंगे और सड़कों पर भी लड़ाई लड़ेंगे।’’

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