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राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रोदा का बड़ा खुलासा - 'प्रियंका गांधी ने खुद लिया था वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला'

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

वाराणसी लोकसभा सीट से पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी के चुनाव मैदान में उतारने के कयासों पर कांग्रेस ने ब्रेक लगा दिया है। ऐसे में रिपब्लिक भारत ने जब इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष और राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रोदा से सवाल किया कि  'पियंका गांधी को वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ाने का फैसला आखिर किसने किया?' इस सवाल के जवाब में सैम पित्रोदा ने कहा कि वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला प्रियंका जी का ही था, उनके पास अन्य जिम्मेदारिया थीं।

सैम पित्रोदा ने कहा राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी वाड्रा पर फैसला छोड़ा था। लेकिन उन्होंने खुद वाराणसी से चुनाव लड़ने से मना किया। पित्रोदा ने कहा प्रियंका गांधी वाड्रा के पास जिम्मेदारीयां थी इसलिए उन्होंने मना कर दिया । रिपब्लिक भारत के रिपोर्टर ने जब उनसे सवाल किया कि क्या राहुल गांधी को उनपर भरोसा नहीं था । इस पर सैम पित्रोदा ने कहा ये गलत है कि राहुल गांधी को इसपर आखिरी फैसला लेना था। बल्कि राहुल गांधी ने प्रियंका पर ही वाराणसी से चुनाव लड़ने का फैसला छोड़ दिया था। 

इससे यह साबित होता है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मिलकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को छला। प्रियंका को पता था कि अगर पहला चुनाव हार गईं तो करियर के लिए खतरा साबित हो सकता है।

बता दें पीएम मोदी के रोड शो से पहले कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा के बजाए अजय राय को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया ।  


इससे पहले अटकले लगाई जा रही थी कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता पीएम मोदी को  कड़ी टक्कर देने के लिए प्रियंका को वाराणसी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रहे थे। पिछले 15 दिनों में जब भी राहुल से प्रियंका के चुनाव लड़ने को लेकर पूछा गया तो उनका जवाब होता था , जल्द ही बड़ा सरप्राइज देखने को मिलेगा। 

वाराणसी सीट उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में आती है और प्रियंका गांधी को इस क्षेत्र की कमान सौंपी गई है। ऐसे में प्रियंका गांधी के पति राबर्ट वाड्रा ने खुद कहा था कि प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहती हैं और पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है। इसके बाद प्रियंका ने भी कई जगह इस बात के संकेत दिए कि वह वाराणसी से चुनाव लड़ने की इच्छुक हैं।

लेकिन कांग्रेस ने अजय राय पर अपना दांव खेला है। अजय राय वाराणसी सीट से विधायक रह चुके हैं। अजय राय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1996 में बीजेपी प्रत्याशी के रूप में उत्तर प्रदेश विभानसभा चुनाव लड़ कर की थी। जिसमें उन्हें विजय प्राप्त हुई थी। उन्होंने सपा से 2009 में लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। इसके बाद वो कांग्रेस में शामिल हुए और 2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताल ठोका था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी को बाहरी और अरविंद केजरीवाल को भगोड़ा करार दिया था।  लेकिन उनका यह दांव काम नहीं आया था और उन्हें महज़ 75 हजार वोट ही मिल सके थे।

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