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रिपब्लिक भारत और 'जन की बात' ओपिनियन पोल: मध्यप्रदेश में BJP की बड़ी वापसी संकेत, कांग्रेस की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

देश के सियासी गलियारों में राजनीतिक उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। सत्ता का महासंग्राम शुरू होने में महज़ कुछ दिन बाकी हैं। चुनाव सिर पर है, ऐसे में किसी के ज़हन में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव में दमदार सिकंदर कौन होगा? सवाल हर किसी के पास है लेकिन जवाब का इंतजार भी बड़ी ही बेसब्री से है। जवाब के बारे में कुछ भी कह पाना शायद आसान नहीं है।

2019 लोकसभा चुनाव में अब बस चंद दिन ही रह गए हैं। इस बीच ओपिनियन पोल आ चुका है। सभी राजनीतिक पार्टियां चुनावी रणनीति बनाने में जुट गईं हैं। ऐसे में रिपब्लिक भारत और 'जन की बात' आपके सामने हिंदुस्तान का सबसे सटीक सर्वे लेकर आए हैं ताकि आपको पता चल सके कि फिलहाल चुनाव में क्या माहौल है। 

इस सर्वे से इस बात का अंदाजा लगा पाना बेहद ही आसान होगा कि आगामी चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं यानी देश का झुकाव किस तरफ है? किस राज्य में किस पार्टी का बोलबाला रहेगा?

इस सर्वे के जरिए हम आपको बताने वाले हैं कि आज देश का मिजाज क्या है। मध्यप्रदेश ने हाल में बड़ा सत्ता परिर्वतन हुआ है। 15 साल से ज्यादा समय से सत्ता पर काबिज बीजेपी को विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। वहीं कांग्रेस ने जोरदार वापसी की थी। 

किसको कितनी सीटें

सर्वे के मुताबिक, मध्य प्रदेश में NDA को 22 से 25 सीटों के बीच मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं UPA को 7 से 4 के बीच में सीटें मिल सकती हैं। हालांकि हाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में थे।

वोट शेयर...

रिपब्लिक भारत और 'जन की बात' के सर्वे के अनुसार, UPA को लगभग 39 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है वहीं NDA को 50 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है । वहीं अन्य उम्मीदवारों को 11 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं ।  

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मारी बाजी

बीते वर्ष मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को मतदान हुआ था और 11 दिसंबर को आए चुनाव परिणाम में प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 114 सीटें मिली हैं। वहीं, भाजपा को 109 सीटें मिली हैं। कांग्रेस ने यहां से पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ को कामन सौंपी है। सीएम बनते ही कमलनाथ ने भाजपा की कई नीतियों को बंद करना शुरू कर दिया। वंदे मातरम पर रोक और MISA कर्मियों की पेंशन पर सेंधमारी करने से सरकार के खिलाफ लोगों ने काफी प्रदर्शन किया था।

बता दें, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी रैलियों में किसानों से वादा किया था कि अगर मध्य प्रदेश में उनकी सरकार बनी तो 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। वहीं मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बनने के तुरंत बाद कमलनाथ ने किसानों की कर्जमाफी के फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए।

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