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VIDEO: प्रियंका के पास नहीं है जीत की गारंटी! चुनाव से पहले हार गई कांग्रेस

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की जो चुनाव के पहले ही हार मान चुकी है। जी हां, अमेठी के गौरीगंज में कार्यकर्ताओं से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने 2022 के चुनाव के लिए तैयारी करने को कहा है। यानि की चुनाव से पहले ही कांग्रेस हार मान चुकी है।

प्रियंका गांधी का ये बयान बताता है कि कांग्रेस आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले ही हिम्मत हार चुकी है। कांग्रेस को पता चल चुका है वो पीएम मोदी की सुनामी के सामने टिक नहीं पाएगी।

यूपी फतह के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। गांव-गांव, मंदिर-मंदिर घूम रही हैं, लेकिन शायद अब प्रियंका को चुनावों में हार का डर सताने लगा है। यही वजह है कि यूपी में पहले जीत का दंभ भरने वाली प्रियंका अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 2019 नहीं बल्कि 2022 की तैयारी करने की नसीहत दे रही हैं।

यूपी फतह के लिए निकली प्रियंका गांधी वाड्रा के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। वाड्रा कांग्रेस की डूबती नैय्या को बचाने के लिए हर दांव आजमा रही हैं।

यूपी जीतने निकली प्रियंका गांधी का अपने ही गढ़ में चुनौतियों से सामना हो रहा है। राहुल गांधी के अमेठी और सोनिया गांधी के रायबरेली में बीजेपी कहानी पलटने की तैयारी में है। तो मां और भाई की जीत तय करने के लिए प्रियंका को यहां आना ही था। लेकिन इस बार हालात भी जुदा है और नतीजे भी जुदा हो सकते हैं।


कार्यकर्ता से बातचीत में प्रियंका ने कुछ यूं कहा... नीचे पढ़ें

प्रियंका गांधी - ठीक हो
कार्यकर्ता - दीदी आपने वादा किया था, कि आपको छोटे भाई की लाज को बचाना है
प्रियंका गांधी - तैयारी कर रहे हो न चुनाव की, इस वाले की नहीं, 22 के लिए 


गौरतलब है कि यूपी के अपने दूसरे दौरे पर निकली प्रियंका का पहला पड़ाव अमेठी है। जहां भाई को जिताने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। कांग्रेस की जीत का परचम लहराने के लिए प्रियंका को चुनावी मैदान में उतारा गया और चुनाव से पहले अमेठी में कार्यकर्ताओं के दिल का हाल जानने राहुल गांधी के संसदीय सीट पर प्रियंका पहुंच गई। लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही उनके खिलाफ ही पोस्टर वार शुरू हो गया। 

अमेठी के मुसाफिरखाना कस्बे में जहां प्रियंका कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक लेने वाली थीं, वहां जगह-जगह पोस्टर लगे, जिसमें लिखा है, 'क्या खूब ठगती हो, क्यों पांच साल बाद ही अमेठी दिखती हो। 60 सालों का हिसाब दो।' 'मई 2014 में किया था वादा, 5 साल बाद क्या लेके आई हो फिर, अमेठी को छलने का इरादा है. 60 सालों का हिसाब दो।'

इन पोस्टरों पर समाजवादी पार्टी के एक स्थानीय नेता का नाम और फोटो भी लगा है, हालांकि उस नेता इस तरह के पोस्टरों को चिपकाने से इनकार कर दिया।

अमेठी पहुंची प्रियंका ने पहले बूथ स्तर के नेताओं से मुलाकात की और फिर हर कार्यकर्ता से मिलने की भी कोशिश की। कार्यकर्ताओं से उनकी बातचीत का जो हिस्सा सामने आया है उससे साफ झलकता है कि कांग्रेस को पहले से शिकस्त का आभास हो गया है।

दरअसल कांग्रेस महासिचव प्रयिंका गांधी ने पार्टी को यूपी में दोबारा खड़ा करने का जो बीड़ा उठाया है उसमें हिंदू वोटरों को वापस पार्टी के पाले में लाने की योजना भी अहम है। लेकिन क्या वो 2022 की तैयारी में जुटी हैं? ये वाकई अहम सवाल है।

कांग्रेस की जीत का परचम लहराने के लिए प्रियंका को चुनावी मैदान में उतारा गया। लेकिन मिशन 2019 की जंग में प्रियंका गांधी का ये कबूलनामा इस बात का संकेत है कि अब वाड्रा कांग्रेस को हार का डर सताने लगा है।

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